बैंक लॉकर में रखे सोने-चांदी की कितनी जिम्मेदारी लेता है बैंक? जानिए RBI का नियम
Bank Locker Rules: सोना-चांदी, कीमती गहने और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग बैंकों में लॉकर खुलवाते हैं। इसके बदले बैंक ग्राहकों से सालाना शुल्क भी लेते हैं। आमतौर पर लोगों को लगता है कि बैंक लॉकर में रखा सामान पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन अगर लॉकर से ही आपके गहने गायब हो जाएं तो क्या होगा? क्या बैंक इसकी पूरी कीमत लौटाने के लिए जिम्मेदार होगा या फिर मुआवजे की कोई सीमा तय है? दिल्ली के एक हालिया मामले ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
Bank Locker Rules: सोना-चांदी, कीमती गहने और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग बैंकों में लॉकर खुलवाते हैं। इसके बदले बैंक ग्राहकों से सालाना शुल्क भी लेते हैं। आमतौर पर लोगों को लगता है कि बैंक लॉकर में रखा सामान पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन अगर लॉकर से ही आपके गहने गायब हो जाएं तो क्या होगा? क्या बैंक इसकी पूरी कीमत लौटाने के लिए जिम्मेदार होगा या फिर मुआवजे की कोई सीमा तय है? दिल्ली के एक हालिया मामले ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
दरअसल, दिल्ली की एक महिला मोनिका मारवाह ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में अपने ससुर के साथ संयुक्त लॉकर खुलवाया था। महिला के मुताबिक, उन्होंने इस लॉकर में करीब 47 लाख रुपये कीमत के गहने रखे थे। सितंबर 2018 में जब वह अपने गहने लेने बैंक पहुंचीं, तो उन्हें बताया गया कि लॉकर पहले ही सरेंडर किया जा चुका है। हालांकि, महिला का कहना था कि उन्होंने कभी लॉकर बंद करने की मांग नहीं की थी और न ही उन्हें गहने वापस किए गए थे।
इसके बाद महिला ने बैंक के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। करीब आठ साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को महिला के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग की अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी ने पाया कि बैंक लॉकर सरेंडर किए जाने या उसमें रखे सामान को महिला को लौटाए जाने का कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं कर सका। आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना और 47 लाख रुपये के गहनों की कीमत पर 1 सितंबर 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक 6 फीसदी सालाना साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया। इसके अलावा 3 लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना और 50 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने को भी कहा गया।
क्या बैंक लॉकर में रखे सामान की पूरी कीमत लौटाता है?
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बैंक लॉकर को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, अगर बैंक परिसर में आग, चोरी, सेंधमारी, डकैती या इमारत ढहने जैसी घटना बैंक की लापरवाही या कमी के कारण होती है, अथवा बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी से लॉकर का सामान गायब होता है, तो बैंक की जिम्मेदारी बनती है। ऐसी परिस्थितियों में बैंक की अधिकतम देनदारी लॉकर के मौजूदा सालाना किराये की 100 गुना राशि के बराबर होती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक का सालाना लॉकर शुल्क 5 हजार रुपये है, तो इस नियम के तहत बैंक की देनदारी 5 लाख रुपये तक होगी। इसका मतलब यह है कि लॉकर में 50 लाख रुपये के गहने रखे होने पर भी RBI के निर्धारित मुआवजे का आधार गहनों की कुल कीमत नहीं, बल्कि लॉकर का सालाना किराया होगा। हालांकि, यदि बैंक की लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या सेवा में कमी को लेकर मामला उपभोक्ता आयोग या अदालत तक पहुंचता है, तो वहां उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर अलग आदेश दिया जा सकता है। दिल्ली की मोनिका मारवाह का मामला इसका उदाहरण है।
क्या लॉकर में रखे गहनों पर 5 लाख रुपये का बीमा मिलता है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। बैंक खातों, एफडी और आरडी में जमा रकम पर डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी DICGC की ओर से प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। लेकिन यह बीमा बैंक लॉकर में रखे गहनों या अन्य कीमती सामान पर लागू नहीं होता। RBI के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, बैंक लॉकर में रखे सामान का रिकॉर्ड नहीं रखते। इसलिए बैंक उस सामान का बीमा कराने के लिए जिम्मेदार नहीं होते। ग्राहक चाहें तो अपने कीमती सामान के लिए अलग से बीमा लेने पर विचार कर सकते हैं।
लॉकर खुलवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
बैंक लॉकर लेने से पहले उसके नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी है। लॉकर में रखे सामान की खरीद से जुड़े बिल, तस्वीरें और मूल्यांकन के दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें। लॉकर के संचालन, संयुक्त धारकों और नॉमिनी से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट रखें। इसके अलावा, लॉकर बंद करवाते समय बैंक से लिखित रसीद जरूर लें। उसमें यह दर्ज होना चाहिए कि लॉकर सरेंडर कर दिया गया है और उसमें रखा सामान ग्राहक को वापस सौंप दिया गया है। किसी भी मौखिक आश्वासन पर निर्भर रहने के बजाय जरूरी दस्तावेज अपने पास रखें।
बैंक लॉकर की सुविधा कीमती सामान सुरक्षित रखने का एक विकल्प जरूर है, लेकिन इसे पूरी कीमत की गारंटी नहीं समझना चाहिए। RBI के नियमों के तहत बैंक की जिम्मेदारी सीमित है और मुआवजे का निर्धारण घटना तथा बैंक की भूमिका के आधार पर होता है। इसलिए लॉकर खुलवाने से पहले नियम समझना और अपने कीमती सामान के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करना बेहद जरूरी है।



