ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला, पूछा- PDA फॉर्मूला कहां गया?
Om Prakash Rajbhar: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के पांच सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद पार्टी में उत्साह का माहौल है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा के दावों पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर का कहना है कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों को विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखना सही नहीं है, क्योंकि दोनों चुनावों की प्रकृति और मतदाता वर्ग अलग-अलग हैं।
Om Prakash Rajbhar: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के पांच सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद पार्टी में उत्साह का माहौल है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा के दावों पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर का कहना है कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों को विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखना सही नहीं है, क्योंकि दोनों चुनावों की प्रकृति और मतदाता वर्ग अलग-अलग हैं।
‘MLC चुनाव आम जनता का नहीं, पढ़े-लिखे वर्ग का था’
मीडिया से बातचीत में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विधान परिषद चुनाव में मतदाताओं की संख्या सीमित थी और इसमें मुख्य रूप से शिक्षक तथा स्नातक मतदाता शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि करीब 14 लाख मतदाताओं वाले इस चुनाव में लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ और कुल वोटों की संख्या करीब छह लाख रही। राजभर ने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि इतने सीमित मतदाताओं के चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने का दावा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन गांवों में दो हजार से पांच हजार तक मतदाता हैं, वहां से भी इस चुनाव में बहुत कम लोग मतदान करने पहुंचे।
राशन, किसान सम्मान निधि और पेंशन का किया जिक्र
ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकारों की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि और पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। उनके अनुसार, सरकार की विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था से लाभान्वित लोग आगामी विधानसभा चुनाव में अलग तरीके से मतदान कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है और दंगे तथा कर्फ्यू की घटनाएं कम हुई हैं। राजभर ने कहा कि इन मुद्दों का प्रभाव विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी के रिश्तों पर भी कसा तंज
राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संबंधों पर भी निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी समाजवादी पार्टी के पक्ष में बोलते हैं, जबकि अखिलेश यादव कांग्रेस को लेकर अलग रुख अपनाते हैं। उनके इस बयान का मकसद विपक्षी गठबंधन के भीतर एकजुटता पर सवाल उठाना था।
गोरखपुर सीट पर सपा की रणनीति पर सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने गोरखपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने संजय त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया था, जबकि राजीव यादव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए। राजभर का दावा है कि निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने से सपा के वोट बंट गए और इसका नुकसान पार्टी के उम्मीदवार को उठाना पड़ा। उन्होंने इस घटनाक्रम को सपा की चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। हालांकि, वोटों के बंटवारे और चुनाव परिणाम पर उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आधिकारिक मतगणना के आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।
‘PDA फॉर्मूला कहां गया?’ राजभर ने उठाए सवाल
राजभर ने समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लाने के राजनीतिक फॉर्मूले पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि सपा इन वर्गों के हितों की राजनीति करती है, तो चुनावी नतीजों और उम्मीदवारों के चयन में इसका प्रभाव किस तरह दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सभी सामाजिक वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व करने में सफल नहीं रही है और पार्टी की राजनीति सीमित समुदायों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। ये आरोप राजभर ने लगाए हैं; सपा की सामाजिक आधार और राजनीतिक रणनीति को लेकर अलग-अलग दलों की अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं।
MLC नतीजों के बाद 2027 की राजनीति पर नजर
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं। सपा के प्रदर्शन के बाद आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर सपा इन नतीजों को अपने लिए उत्साहजनक मान रही है, वहीं ओम प्रकाश राजभर जैसे एनडीए सहयोगी नेता इसे विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानने से इनकार कर रहे हैं।
अब आने वाले महीनों में भाजपा, उसके सहयोगी दलों और विपक्षी गठबंधन की रणनीतियों पर नजर रहेगी। फिलहाल MLC चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है, लेकिन विधानसभा चुनाव में जनता का रुख क्या होगा, यह अलग चुनावी परिस्थितियों और मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।



