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मोहन भागवत की दशहरा स्पीच की बड़ी बातें, रिजीम चेंज से AI और हिंदू-मुस्लिम एकता तक क्या-क्या कहा?

RSS Chief Dussehra Speech: मोहन भागवत की दशहरा स्पीच में आंदोलन, रिजीम चेंज, AI, ड्रग्स, नई पीढ़ी और हिंदू-मुस्लिम एकता समेत कई अहम मुद्दों पर बड़ा संदेश दिया गया। जानिए पूरी बात।

RSS Chief Dussehra Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में विजयादशमी का आयोजन हुआ। इस दौरान शस्त्र पूजन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में देश और दुनिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उनकी दशहरा स्पीच में वैश्विक घटनाक्रम, भारत में हो रहे आंदोलन, रिजीम चेंज (Regime Change), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नई पीढ़ी, ड्रग्स, ओटीटी और हिंदू-मुस्लिम एकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

मोहन भागवत ने कहा कि देश की नई पीढ़ी को समस्याओं का हिस्सा बनने के बजाय समाधान का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने भारत की प्रगति के लिए समाज में एकजुटता और सद्भाव बनाए रखने को जरूरी बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी गतिविधि के कारण समाज में टकराव, द्वेष या विभाजन की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

आंदोलन को लेकर भागवत ने क्या कहा?

मोहन भागवत ने कहा कि भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और जब तक विकास पूरी तरह नहीं हो जाता, तब तक समस्याएं भी रहेंगी। उन्होंने कहा कि समस्याओं के कारण आंदोलन होना स्वाभाविक है और लोकतंत्र में आंदोलन होते भी हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंदोलन समस्या पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि उसका समाधान तलाशने के लिए होना चाहिए। किसी भी कृति या गतिविधि से समाज में अनबन, द्वेष या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।

संघ प्रमुख ने कहा कि अखंड समाज में किसी भी वजह से विघटन नहीं होना चाहिए। सस्ती लोकप्रियता भी लोगों और नेतृत्व पर हावी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन करने वाले समूहों और नेताओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

उनके मुताबिक किसी के व्यवहार से समाज में आपसी टकराव, नफरत या विभाजन की स्थिति नहीं बननी चाहिए। वोट, सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक लाभ का लालच समझ और सद्भावना पर हावी नहीं होना चाहिए।

दूसरे मकसद वाला आंदोलन राजनीतिक साधन बन जाता है

मोहन भागवत ने कहा कि अगर किसी आंदोलन का उद्देश्य कुछ और हो तो वह राजनीति का साधन बन जाता है। इसका फायदा भारत को दबाने वाली शक्तियां उठा सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी शक्तियां भारत को बांटकर दूसरा वर्ग बनाने और असंतोष व अराजकता फैलाने का काम करती हैं। इसी दौरान उन्होंने आशा भोसले के एक गाने का भी उल्लेख किया।

फ्रांस से नेपाल और बांग्लादेश तक का जिक्र

दशहरा संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में हुई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने पश्चिमी प्रभाव को लेकर कहा, “एक पश्चिम से आंधी चली है, जो हर तरह की व्यवस्था, भद्रता, मांगल्य और सांस्कृतिक मानवीय संस्कार से विरोध रखती है। उसको नष्ट भ्रष्ट करना चाहती है। और प्रगति देश भी उससे त्रस्त है। अभी दो चार दिन पहले से जो समाचार आ रहे हैं, वो सुन लीजिए। अल्बानिया में क्या हो रहा है। बांग्लादेश में क्या हुआ, नेपाल में क्या हुआ, ये सब किया कराया उनका है, वो कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बनती है। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ है, आज भी नहीं हुआ है।”

मोहन भागवत ने कहा कि फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में जो घटनाएं हुईं, वे एक सोचे-समझे षड्यंत्र का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि रिजीम चेंज (Regime Change) के नाम पर दुनिया में जो गतिविधियां चल रही हैं, उनसे प्रगतिशील देश भी परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि रिजीम चेंज से परिस्थितियां न पहले बदली हैं और न आगे बदलेंगी। उनके मुताबिक अपने स्वार्थ का पोषण करने वाले अपने पिठ्ठू हर जगह प्रभावी रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी गतिविधियां चलती रहती हैं और भारत का बड़ा होना इसमें बाधा बनेगा। भारत में भी ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत को बड़ा बनाने के लक्ष्य पर सावधान रहने की बात

मोहन भागवत ने कहा कि भारत को कमजोर करने की साजिश की जा रही है और रिजीम चेंज के जरिए समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि विश्व की शक्ति विचित्र है। उनको भारत चाहिए भी और भारत बड़ा भी नहीं होना चाहिए। क्योंकि उनके बड़प्पन को झटका लगेगा, इसलिए वो भी अपना खेल खेलना चाहती है।

उन्होंने कहा कि भारत को बड़ा बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सावधान रहना होगा। परस्पर सद्भावना की रक्षा करनी होगी और किसी तरह उत्तेजित हुए बिना लगातार प्रयास करते रहना होगा।

AI को लेकर मोहन भागवत की चेतावनी

संघ प्रमुख ने विज्ञान और तकनीक को लेकर कहा कि इसकी प्रगति ने लोगों का जीवन आसान और सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इसका इस्तेमाल विवेक और नैतिकता के साथ किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है, खुद जीवन का उद्देश्य नहीं। केवल भौतिक सुविधाओं और उपभोग पर आधारित विकास पर्यावरण और मानव जीवन के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

नेपाल में आई आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे हिमालयी क्षेत्र में अपनाए गए एकतरफा विकास की भूमिका भी रही है।

उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल सही होगा या गलत, यह व्यक्ति की समझ पर निर्भर करता है। परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल स्वच्छ ऊर्जा के लिए भी किया जा सकता है और विनाशकारी हथियारों के निर्माण के लिए भी।

AI पर मोहन भागवत ने कहा, “AI जैसी उपयोगी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने, ठगने और झूठ फैलाने के भी किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि परमाणु तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। भारत को पर्यावरण संरक्षण, नैतिकता, संयम और समन्वय पर आधारित संतुलित विकास का उदाहरण बनना चाहिए।

नई पीढ़ी को दी सही-गलत पहचानने की सीख

मोहन भागवत ने अभिभावकों और नई पीढ़ी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “आज के अभिभावकों को अपनी इस नई पीढ़ी को चुनने की कला सिखानी होगी। इन बच्चों को उचित और अनुचित में से चुनाव करना सिखाना होगा। युवाओं को सही आचरण अपनाना होगा क्योंकि आचरण त्यागने के कारण ही हमारा पतन हुआ था और हम गुलाम हुए थे।”

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सीखने के लिए उत्सुक रहती है और नई चीजें उसे आकर्षित करती हैं। लेकिन युवाओं को सही और गलत के बीच अंतर समझना जरूरी है।

ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाएगा RSS

संघ प्रमुख ने नशीली दवाओं की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी ड्रग्स की आदी होती जा रही है। उन्होंने इसे गंभीर समस्या बताते हुए अभिभावकों से आने वाली पीढ़ी को नशे के नुकसान के बारे में समझाने की बात कही।

मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस खुद नशे के खिलाफ भारत में अभियान चलाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा सभी को अपनाती है और हर व्यक्ति के भीतर ‘राष्ट्र सबसे पहले’ का भाव होना जरूरी है।

OTT प्लेटफॉर्म को लेकर भी कही बात

मोहन भागवत ने कहा कि अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को नई पीढ़ी कई बार उचित-अनुचित का विचार किए बिना ग्रहण कर लेती है। इसके दुष्परिणामों को देखते हुए कई देशों ने कुछ अनुशासन और प्रतिबंध लागू किए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में भी विशेष तौर पर ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ को लेकर ऐसी आवश्यकता समाज में महसूस की जा रही है। शासन-प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए। भागवत ने कहा कि वर्तमान अभिभावक पीढ़ी को नई पीढ़ी में सही और गलत को समझने का विवेक विकसित करना होगा।

हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर बड़ा संदेश

संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में अच्छा माहौल बनाए रखने के लिए सभी को धैर्य और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। लोगों को सोच-समझकर काम करना चाहिए और एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनके प्रभाव में आकर भारतीयों को उत्तेजित नहीं होना चाहिए।

लॉर्ड कर्जन का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया गया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका, क्योंकि लोगों के मन में यह भावना आ गई थी कि जो अलग दिखते हैं, वे अलग ही हैं।

‘हमारे पूर्वज एक हैं’

मोहन भागवत ने कहा कि सभी के पूर्वज एक हैं और सबको साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का मूल भी एक है।

उन्होंने कहा कि किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है।

‘हिंदू भाव में विश्व को जोड़ने की शक्ति’

मोहन भागवत ने कहा, “हिंदुओं का स्वभाव है समाज और राष्ट्र की सुरक्षा करना।” उन्होंने हाल ही में कैप्टन स्मित मच्छार के फ्लाईदुबई फ्लाइट में लोगों की जान बचाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला कदम तो था ही, यह हिंदू स्वभाव भी था।

उन्होंने कहा कि हिंदू भाव में विश्व को जोड़ने की शक्ति है। इसके साथ ही यह राष्ट्रीय और वैश्विक शांति के लिए भी उठाया गया महत्वपूर्ण कदम था। मोहन भागवत ने कहा कि सभी युवाओं को राष्ट्रबोध और कर्तव्यनिष्ठा को समझने की जरूरत है।

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