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टाइगर श्रॉफ पर गोलियां चलवाने वाला कौन? मास्टरमाइंड के साथी की गिरफ्तारी से खुले नए राज

Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में एक और गिरफ्तारी हुई है। हरियाणा पुलिस की मदद से समीर पकड़ा गया, जो कथित मास्टरमाइंड अनिल पंडित का साथी बताया जा रहा है। जानें हमले की साजिश, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी और रैपिडो की सफाई।

Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर रविवार शाम हुए फायरिंग कांड की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। टाइगर श्रॉफ की गाड़ी को निशाना बनाकर कई राउंड गोलियां चलाई गई थीं। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों रेहान, फूल सिंह और रितिक कुमार को कोटा से गिरफ्तार कर लिया था। अब इस मामले में एक और गिरफ्तारी हुई है। हरियाणा पुलिस की मदद से समीर नाम के युवक को पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक समीर कथित मास्टरमाइंड अनिल पंडित का करीबी है और इसी के जरिए हमले को अंजाम देने वाले तीनों आरोपियों को तैयार किया गया था।

समीर ने आरोपियों को मास्टरमाइंड से मिलाया

टाइगर श्रॉफ पर हमला (Tiger Shroff Attack) मामले की जांच में पुलिस को पता चला है कि समीर ने तीनों आरोपियों की बातचीत कैलिफोर्निया में मौजूद अनिल पंडित से कराई थी। पुलिस के अनुसार अनिल पंडित का संबंध लॉरेंस गैंग से बताया जा रहा है।

आरोप है कि समीर ने रेहान उर्फ सुक्का को इस काम के लिए तैयार किया था। इसके बदले उसे 35 हजार रुपये देने के साथ विदेश भेजकर वहां बसाने का लालच दिया गया था। अब पुलिस समीर की भूमिका और अनिल पंडित के साथ उसके संपर्क को लेकर पूछताछ कर रही है।

रेहान और फूल सिंह पहले भी फंसे हैं

पुलिस जांच में रेहान उर्फ सुक्का का पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया है। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट और चोरी से जुड़े मामले पहले दर्ज हैं। इसके अलावा रेहान और फूल सिंह ने इससे पहले अमृतसर के एक व्यापारी पर गोली चलाने की कोशिश की थी। हालांकि उस समय उनकी पिस्टल से फायर नहीं हो सका था।

पुलिस के मुताबिक दोनों करीब एक महीने पहले मुंबई पहुंचे थे। यहां उनकी मुलाकात रितिक कुमार से कराई गई। रितिक को मुंबई के रास्तों और शहर की जानकारी थी, इसलिए उसे भी इस पूरी योजना में शामिल किया गया।

तीनों को विदेश में बसाने का लालच

जांच के दौरान सामने आया है कि रितिक कुमार को भी विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने और वहां स्थायी तौर पर बसाने का लालच दिया गया था। तीनों आरोपियों के खर्च और मौज-मस्ती के लिए कथित तौर पर अनिल पंडित विदेश से ऑनलाइन पैसे भेजता था।

पैसे हासिल करने के लिए आरोपी किसी दुकान पर ऑनलाइन रकम मंगवाते और उसके बदले दुकानदार से नकद रुपये ले लेते थे। इस तरीके से उन्हें खर्च के लिए कैश उपलब्ध कराया जाता था।

बिना पहचान के ऐप से संपर्क

पुलिस के अनुसार अनिल पंडित और आरोपियों के बीच बातचीत जग्गी ऐप के जरिए होती थी। बताया जा रहा है कि इस ऐप पर बातचीत करने के लिए यूजर की पहचान जरूरी नहीं होती। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस माध्यम से और किन लोगों के संपर्क में आरोपी थे।

हथियारों की व्यवस्था को लेकर भी जांच में अहम जानकारी सामने आई है। आरोपियों के पास हथियार पहुंचाने के लिए कोई व्यक्ति सीधे नहीं आया था। उन्हें एक संदेश मिला था कि हथियार कचरा पात्र के पास एक तय जगह पर रखे गए हैं। आरोपियों ने वहीं से हथियार उठा लिए थे।

पुलिस को अब संदेह है कि मुंबई में इन तीनों के कुछ और संपर्क भी थे। इन लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

हमले के बाद मुंबई से निकलने की तैयारी

18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग के बाद रेहान, फूल सिंह और रितिक कुमार अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों में तीनों के दिखाई देने की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक तीनों ने मुंबई से निकलने के लिए पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस पकड़ने की योजना बनाई थी। इसके बाद उनका इरादा नेपाल जाने का था। हालांकि कोटा पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

हमले के महज 24 घंटे के भीतर पुलिस ने तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। अभी तीनों कोटा में हैं। उन्हें जल्द मुंबई लाए जाने की तैयारी है, जहां उनसे पूछताछ कर हमले की साजिश से जुड़ी बाकी कड़ियों का पता लगाया जाएगा।

क्या हमलावर रैपिडो का ड्राइवर था?

इस मामले में रैपिडो (Rapido) की ओर से भी सफाई जारी की गई है। कंपनी ने टाइगर श्रॉफ और उनकी टीम के साथ हुई घटना पर चिंता जताई है। रैपिडो ने कहा कि उसे राहत है कि टाइगर श्रॉफ सुरक्षित हैं और कंपनी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करती है।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मामले से जुड़ा एक व्यक्ति रैपिडो प्लेटफॉर्म पर कैप्टन यानी ड्राइवर के रूप में पंजीकृत था। इसके बाद कंपनी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति 14 अक्टूबर से रैपिडो पर कैप्टन के रूप में सक्रिय नहीं था।

घटना के दिन ड्राइवर नहीं, ग्राहक था

रैपिडो के मुताबिक घटना वाले दिन संबंधित व्यक्ति ने कंपनी की सेवा जरूर ली थी, लेकिन वह ड्राइवर के रूप में नहीं बल्कि ग्राहक बनकर सेवा का इस्तेमाल कर रहा था।

कंपनी ने बताया कि भारत की गिग इकोनॉमी (Gig Economy) में एक व्यक्ति का एक से ज्यादा ऐप और प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन होना आम बात है। ऐसे में किसी प्लेटफॉर्म पर पुराना रजिस्ट्रेशन होना यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति घटना के वक्त उसी प्लेटफॉर्म के ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था।

रैपिडो ने कहा कि वह इस पूरे मामले में पुलिस और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। जांच एजेंसियों की ओर से मांगी गई जानकारी कंपनी ने उपलब्ध कराई है और आगे भी जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।

कंपनी ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि हिंसा और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि को लेकर उसकी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी (Zero Tolerance Policy) है। जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर आगे भी हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस (Tiger Shroff Firing Case) में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद समीर की गिरफ्तारी से जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस अब कथित मास्टरमाइंड अनिल पंडित के नेटवर्क, मुंबई में आरोपियों के संपर्क और हमले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी जुटाने में लगी है।

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