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PM मोदी के दशहरा भाषण की 10 बड़ी बातें, देश के ‘तीन दुश्मनों’ से रामराज्य तक क्या-क्या बोले?

PM Modi Dussehra Speech: पीएम नरेंद्र मोदी ने दशहरा भाषण में देश के तीन दुश्मनों, रामराज्य, राष्ट्रीय एकता, गरीबों की सेवा और विकसित भारत समेत कई अहम मुद्दों पर बात की। जानिए भाषण की 10 बड़ी बातें।

PM Modi Dussehra Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित विजयादशमी (Vijayadashami) कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों, रामराज्य (Ram Rajya), राष्ट्रीय एकता (National Unity), सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) और विकसित भारत (Developed India) के लक्ष्य को लेकर कई अहम बातें कहीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।

देश के तीन बड़े दुश्मनों का किया जिक्र

पीएम मोदी ने अपने दशहरा भाषण (Dussehra Speech) में देश के सामने मौजूद तीन तरह की चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें, समाज में फूट डालने वाले लोग और भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली सोच देश के लिए चुनौती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन ताकतों का मुकाबला देश को मिलकर करना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और देशहित को सबसे ऊपर रखने की जरूरत बताई।

सभी दलों और संस्थाओं से एकजुट होने की अपील

पीएम मोदी ने कहा कि देश के सभी राजनीतिक दलों (Political Parties) और संस्थाओं को राष्ट्रीय हित (National Interest) में मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना था कि जब देश के सामने बड़ी चुनौतियां हों तो सभी को मिलकर उनका सामना करना चाहिए।

उन्होंने देश की एकता और सामूहिक शक्ति को मजबूत करने पर जोर दिया।

‘रामराज्य में सत्ता नहीं, जनसेवा सबसे अहम’

प्रधानमंत्री ने रामराज्य (Ram Rajya) की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मतलब ऐसा शासन है, जहां किसी के साथ भेदभाव नहीं हो और सभी को न्याय (Justice) तथा आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि सत्ता का उद्देश्य सिर्फ शासन करना नहीं बल्कि जनता की सेवा (Public Service) और जनकल्याण (Public Welfare) होना चाहिए। रामराज्य की यही भावना शासन व्यवस्था के लिए एक आदर्श हो सकती है।

गरीब और वंचित लोगों की सेवा पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि शासन और व्यवस्था में गरीब (Poor) और वंचित वर्ग (Marginalised Sections) की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने जनसेवा को रामराज्य की मूल भावना से जोड़ते हुए कहा कि व्यवस्था का मकसद समाज के हर वर्ग तक सुविधाएं और अवसर पहुंचाना होना चाहिए।

‘राम के जीवन से सत्य और मर्यादा की सीख’

प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम के जीवन (Life of Lord Ram) को कठिन परिस्थितियों में भी सत्य (Truth), धर्म (Dharma) और मर्यादा (Values) के रास्ते पर चलने का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि भगवान राम का आदर्श सिर्फ रावण पर विजय तक सीमित नहीं है। उनके जीवन से लोगों को त्याग, संयम, कर्तव्य और मर्यादा की सीख मिलती है। यही मूल्य आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं।

निषादराज और माता शबरी का भी किया जिक्र

पीएम मोदी ने भगवान राम और निषादराज (Nishadraj) तथा माता शबरी (Mata Shabari) से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन प्रसंगों के जरिए प्रेम, करुणा, सद्भाव और सम्मान की भावना पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान राम का जीवन समाज के अलग-अलग वर्गों को साथ लेकर चलने और सभी के सम्मान का संदेश देता है।

आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) और विकसित भारत (Developed India) के लक्ष्य की भी बात की। उन्होंने भगवान राम की लंका तक की यात्रा का जिक्र करते हुए सामूहिक प्रयास और दृढ़ संकल्प की सीख से इसे जोड़ा। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपने सामर्थ्य और संसाधनों पर भरोसा करते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया।

‘650 से ज्यादा पुरावशेष भारत वापस लाए गए’

प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विरासत (Indian Cultural Heritage) को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 650 से ज्यादा प्राचीन मूर्तियां और पुरावशेष भारत वापस लाए गए हैं।

पीएम मोदी ने इसे देश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

‘राम से राष्ट्र, देव से देश’ का विजन

पीएम मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (Ram Temple Consecration) के दौरान सामने रखे गए ‘राम से राष्ट्र, देव से देश’ के विजन का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों को देश के विकास और राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हुए आगे बढ़ना जरूरी है। राम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण (Nation Building) की दिशा में काम करने का संदेश भी उनके संबोधन में दिखाई दिया।

‘दशहरा भारत की सांस्कृतिक जीवनशक्ति’

प्रधानमंत्री ने विजयादशमी को सिर्फ एक त्योहार (Festival) नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने रामलीला (Ramlila) की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह भगवान राम के आदर्शों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी सत्य की असत्य पर और अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश देती है। यही वजह है कि यह पर्व भारत की सांस्कृतिक चेतना में विशेष महत्व रखता है।

एकता और राष्ट्रहित पर जोर

पीएम मोदी के पूरे संबोधन में राष्ट्रीय एकता (National Unity), रामराज्य (Ram Rajya), जनसेवा (Public Service), सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) और विकसित भारत (Developed India) जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने देशवासियों से भगवान राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने और देशहित में एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

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