ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो देखना, सोशल मीडिया रील चलाना या स्पीकर पर गाने सुनना अब भारी पड़ सकता है।
ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो देखना, सोशल मीडिया रील चलाना या स्पीकर पर गाने सुनना अब भारी पड़ सकता है।
नई दिल्ली। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो देखना, सोशल मीडिया रील चलाना या स्पीकर पर गाने सुनना अब भारी पड़ सकता है। सहयात्रियों की सुविधा और ट्रेन में शांति बनाए रखने के लिए दक्षिण रेलवे ने ऐसे व्यवहार के खिलाफ सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों को चेतावनी दी गई है कि यदि मोबाइल की तेज आवाज से दूसरों को परेशानी होती है, तो रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अक्सर ट्रेन में सफर करते समय कुछ यात्री मोबाइल फोन पर रील, फिल्म या गाने तेज आवाज में चलाते हैं। वहीं, कई लोग स्पीकर ऑन करके लंबी बातचीत करते रहते हैं। इससे खासकर रात के समय सो रहे यात्रियों और एसी कोच में सफर कर रहे लोगों को परेशानी होती है। रेलवे को इस तरह की शिकायतें मिलने के बाद यात्रियों को नियमों के प्रति जागरूक करने और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहली बार गलती करने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना
दक्षिण रेलवे की ओर से जारी निर्देशों में रेलवे अधिनियम की धारा 145 का हवाला दिया गया है। इसके तहत ट्रेन या रेलवे परिसर में दूसरों को परेशान करने वाले व्यवहार पर कार्रवाई हो सकती है। नियमों के अनुसार, दोषी पाए जाने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार यात्री को ट्रेन या रेलवे परिसर से हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
बार-बार नियम तोड़ने पर बढ़ सकती है सजा
रेलवे की चेतावनी के बावजूद यदि कोई यात्री दूसरों को परेशान करना जारी रखता है, तो उसे गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद, 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, सजा मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी। केवल मोबाइल पर रील देखने से हर स्थिति में इतनी सजा तय नहीं होती।
यात्रियों को दी गई ये सलाह
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि मोबाइल पर वीडियो या संगीत सुनते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करें। फोन पर बात करते समय आवाज धीमी रखें और अनावश्यक रूप से लंबी बातचीत से बचें। मोबाइल को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखना भी बेहतर है।
नियमों की जानकारी अधिक से अधिक यात्रियों तक पहुंचाने के लिए स्टेशनों और ट्रेनों में उद्घोषणा करने तथा नोटिस लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकृत रेलवे कर्मचारी नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।
यदि किसी सहयात्री की तेज आवाज से परेशानी होती है, तो यात्री रेलवे कर्मचारियों को इसकी जानकारी दे सकते हैं या रेल मदद के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सफर को आरामदायक बनाने के लिए जरूरी है कि यात्री अपनी सुविधा के साथ दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखें।




