उत्तराखंड

धामी सरकार की पहल: गैरसैंण में मार्च के बाद अक्टूबर में भी विधानसभा सत्र

Gairsain Assembly Session:उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण ने राज्य की विधायी गतिविधियों के लिहाज से एक नया अध्याय जोड़ा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पहली बार एक ही साल के भीतर यहां दो विधानसभा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मंगलवार से शुरू हुए सत्र से पहले इसी वर्ष मार्च में बजट सत्र आयोजित किया गया था। अक्टूबर में दोबारा विधानसभा की कार्यवाही शुरू होना गैरसैंण को राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। यह क्षेत्र राज्य आंदोलन की भावनाओं, पर्वतीय पहचान और पहाड़ों के संतुलित विकास की अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां नियमित रूप से विधानसभा सत्र आयोजित किए जाने को पर्वतीय क्षेत्रों के मुद्दों को प्रमुखता देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

Gairsain Assembly Session: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण ने राज्य की विधायी गतिविधियों के लिहाज से एक नया अध्याय जोड़ा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पहली बार एक ही साल के भीतर यहां दो विधानसभा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मंगलवार से शुरू हुए सत्र से पहले इसी वर्ष मार्च में बजट सत्र आयोजित किया गया था। अक्टूबर में दोबारा विधानसभा की कार्यवाही शुरू होना गैरसैंण को राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। यह क्षेत्र राज्य आंदोलन की भावनाओं, पर्वतीय पहचान और पहाड़ों के संतुलित विकास की अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां नियमित रूप से विधानसभा सत्र आयोजित किए जाने को पर्वतीय क्षेत्रों के मुद्दों को प्रमुखता देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

वर्ष 2014 से शुरू हुआ विधानसभा सत्रों का सिलसिला

गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वर्ष पहली बार तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र हुआ। वर्ष 2018 में यहां विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक चली। हालांकि, गैरसैंण में हर साल विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हो सके। वर्ष 2019 में यहां कोई सत्र नहीं हुआ। वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र आयोजित किया गया, जबकि वर्ष 2021 में एक से छह मार्च तक छह दिवसीय बजट सत्र चला। वर्ष 2022 में भी गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में चार दिन और वर्ष 2024 में तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2025 में यहां बजट और मानसून सत्र हुए। वहीं, वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में फिर विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई है। इस तरह एक ही वर्ष में दो बार सत्र आयोजित होने से गैरसैंण की विधायी भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है।

पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने का अवसर

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन, पेयजल और आपदा प्रबंधन जैसी चुनौतियां लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही हैं। गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होने से इन मुद्दों को राज्य की विधायी चर्चा में प्रमुखता देने का अवसर मिलता है। भराड़ीसैंण में सत्र आयोजित करने का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इससे शासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों की ओर केंद्रित होता है। स्थानीय जनभावनाओं, क्षेत्रीय विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए गैरसैंण एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। हालांकि, सत्रों की संख्या बढ़ने के साथ यह भी जरूरी है कि सदन में उठाए गए मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई हो और विकास योजनाओं का लाभ संबंधित क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचे। गैरसैंण की भूमिका तभी और मजबूत होगी, जब यहां होने वाली विधायी चर्चा का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया जनभावनाओं का प्रतीक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जन अपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ लगातार काम कर रही है।

गैरसैंण की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में कदम

एक ही साल में दो विधानसभा सत्रों का आयोजन गैरसैंण के महत्व को रेखांकित करता है। इससे ग्रीष्मकालीन राजधानी में विधायी गतिविधियों की निरंतरता बढ़ाने और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से सामने लाने की संभावनाएं बनती हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि गैरसैंण में होने वाली बैठकों और चर्चाओं के साथ क्षेत्रीय विकास की योजनाओं को भी गति मिले। स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं, रोजगार के अवसरों, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं तथा मजबूत आधारभूत ढांचे पर निरंतर काम किया जाए।

कुल मिलाकर, वर्ष 2026 में मार्च और अक्टूबर में विधानसभा सत्रों का आयोजन गैरसैंण के इतिहास में एक उल्लेखनीय घटनाक्रम है। यह पहल पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों को शासन की प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। आने वाले समय में सत्रों की नियमितता और उनसे जुड़े ठोस निर्णय ही यह तय करेंगे कि गैरसैंण राज्य के संतुलित विकास में कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है।

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