शराब दुकानों पर ओवररेटिंग के आरोप, आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
Narsinghpur News: नरसिंहपुर। शराब दुकान पर निर्धारित कीमत से अधिक पैसे वसूले जाने की शिकायत अगर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच रही है, तो यह संबंधित व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है। ग्राहक अपनी जेब से पैसा देता है, लेकिन उसे तय कीमत पर सामान मिलना सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है? नियम सिर्फ कागजों में लिखने के लिए हैं या उनका पालन कराने की जवाबदेही भी किसी की है? नरसिंहपुर जिले में शराब दुकानों की कथित ओवररेटिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की बिक्री को लेकर शिकायत दर्ज होने के बाद अब आबकारी विभाग की भूमिका पर नजरें टिक गई हैं। शिकायतकर्ता देवधर पत्रकार ने 25 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 41273707 दर्ज कराते हुए डांगीढाना, मुंगवानी, सुरवारी और बरहेटा सहित आसपास के क्षेत्रों में जांच की मांग की है।
Narsinghpur News: नरसिंहपुर। शराब दुकान पर निर्धारित कीमत से अधिक पैसे वसूले जाने की शिकायत अगर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच रही है, तो यह संबंधित व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है। ग्राहक अपनी जेब से पैसा देता है, लेकिन उसे तय कीमत पर सामान मिलना सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है? नियम सिर्फ कागजों में लिखने के लिए हैं या उनका पालन कराने की जवाबदेही भी किसी की है? नरसिंहपुर जिले में शराब दुकानों की कथित ओवररेटिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की बिक्री को लेकर शिकायत दर्ज होने के बाद अब आबकारी विभाग की भूमिका पर नजरें टिक गई हैं। शिकायतकर्ता देवधर पत्रकार ने 25 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 41273707 दर्ज कराते हुए डांगीढाना, मुंगवानी, सुरवारी और बरहेटा सहित आसपास के क्षेत्रों में जांच की मांग की है।
यह मामला केवल अधिक पैसे वसूले जाने के आरोप तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी है कि शराब दुकानों की निगरानी किस तरह हो रही है और शिकायतों पर कार्रवाई का तंत्र कितना प्रभावी है। यदि दुकानों पर निर्धारित MRP से अधिक राशि वसूली जा रही है, तो यह पता लगाना विभाग का काम है कि ऐसा कहां और किन परिस्थितियों में हो रहा है। यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं, तो जांच के निष्कर्ष सामने रखे जाने चाहिए।
आबकारी विभाग आखिर किसका इंतजार कर रहा है?
शिकायत दर्ज होने के बाद सबसे अहम सवाल यही है कि अब कार्रवाई कब और कैसे होगी। क्या अधिकारी संबंधित दुकानों की जांच करेंगे? क्या बिक्री दरों और नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पड़ताल की जाएगी? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की आपूर्ति और बिक्री की वैधता की जांच होगी? या फिर शिकायत का निराकरण एक औपचारिक जवाब देकर कर दिया जाएगा?आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल राजस्व जुटाने तक सीमित नहीं हो सकती। नियमों का पालन सुनिश्चित करना, अनियमितताओं पर नजर रखना और शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना भी उसकी जिम्मेदारी है। पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं, तो उनकी समीक्षा भी तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
शिकायत का नंबर नहीं, कार्रवाई का हिसाब चाहिए
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप का प्रमाण नहीं है। लेकिन शिकायत सामने आने के बाद उसकी निष्पक्ष जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी जरूर है। अगर ओवररेटिंग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अगर आरोप सही नहीं पाए जाते, तो जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि निर्धारित कीमत से अधिक वसूली की शिकायतों को रोकने के लिए विभाग क्या कर रहा है। निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है और शिकायत मिलने पर जिम्मेदार अधिकारी कितनी तत्परता दिखाते हैं
अब विभाग को जवाब देना होगा—क्या नियमों का पालन सुनिश्चित होगा या शिकायतकर्ता को केवल कार्रवाई के आश्वासन से संतोष करना पड़ेगा? नरसिंहपुर की इस शिकायत पर होने वाली कार्रवाई केवल एक मामले का नतीजा नहीं होगी, बल्कि यह भी बताएगी कि विभागीय जवाबदेही जमीन पर कितनी दिखाई देती है। जांच निष्पक्ष हो, तथ्य सामने आएं और दोष साबित होने पर कार्रवाई हो—यही जनता की अपेक्षा है।क्योंकि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता शिकायत दर्ज करने से नहीं, शिकायत पर निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई करने से साबित होती है।



