आपदा से निपटने के लिए उत्तराखंड तैयार, 4310 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित करने की पहल
Uttarakhand News: प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में राहत और बचाव कार्यों को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों में तत्काल मदद पहुंचाने के लिए प्रदेश में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की फौज तैयार की जा रही है। इसी कड़ी में आपदा मित्र योजना के तहत चयनित 4310 स्वयंसेवकों में से अब तक 3103 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शेष 1207 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की तैयारी चल रही है, ताकि आपदा के समय स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम दिया जा सके।
Uttarakhand News: प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में राहत और बचाव कार्यों को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों में तत्काल मदद पहुंचाने के लिए प्रदेश में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की फौज तैयार की जा रही है। इसी कड़ी में आपदा मित्र योजना के तहत चयनित 4310 स्वयंसेवकों में से अब तक 3103 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शेष 1207 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की तैयारी चल रही है, ताकि आपदा के समय स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम दिया जा सके।
4310 चयनित स्वयंसेवकों में से 3103 प्रशिक्षित
उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए आपदा मित्र योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में चयनित 4310 स्वयंसेवकों में से 3103 प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, शेष 1207 स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, प्रयास किया जा रहा है कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर शेष स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया जाए। इससे प्रदेश में आपात परिस्थितियों के दौरान प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर राहत-बचाव कार्यों में मदद मिलेगी।
NCC, NSS और स्काउट-गाइड के स्वयंसेवक भी शामिल
आपदा मित्र योजना के तहत युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), नेहरू युवा केंद्र और भारत स्काउट-गाइड से जुड़े स्वयंसेवकों का चयन किया जा रहा है। इन स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण देकर आपात परिस्थितियों में मदद करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी आपदा के समय स्थानीय स्तर पर ऐसे लोग उपलब्ध रहें, जो शुरुआती राहत कार्यों में सहयोग कर सकें और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम करें।
आपदा के शुरुआती घंटों में मिलेगी मदद
प्राकृतिक आपदा के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिक सहायता, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत-बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे कार्यों में सहयोग कर सकते हैं। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में कई बार दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और बाधित संपर्क मार्गों के कारण राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आपदा मित्रों को इसी उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में समुदाय की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़े और सरकारी राहत-बचाव तंत्र को स्थानीय सहयोग मिल सके।
आपदा प्रबंधन में जनभागीदारी पर जोर
केंद्र के सहयोग से संचालित इस योजना का उद्देश्य आपदा के समय त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ आमजन की सहभागिता को बढ़ाना भी है। आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय समुदायों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद से लोगों को आपदा के दौरान आवश्यक सावधानियों, सुरक्षित व्यवहार और राहत कार्यों में सहयोग के बारे में जागरूक किया जा सकता है। इससे आपदा के प्रति समुदाय की तैयारी मजबूत करने में मदद मिलती है।
अगले दो-तीन महीनों में प्रशिक्षण पूरा करने का लक्ष्य
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, शेष 1207 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण अगले दो से तीन महीनों में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रदेश में आपदा मित्रों की उपलब्धता और बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर आपात स्थितियों में शुरुआती सहायता उपलब्ध कराने तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ समन्वय मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में आपदा मित्र योजना आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और स्थानीय समुदायों को राहत-बचाव कार्यों से जोड़ने की दिशा में अहम पहल है। 4310 चयनित स्वयंसेवकों में से 3103 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि शेष 1207 को प्रशिक्षित करने की तैयारी है। लक्ष्य है कि आपदा के समय मदद पहुंचाने में देरी कम हो और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित लोगों की सहायता कर सकें।



