उत्तराखंड

'22 साल तक चुप क्यों...', अपनी ही मंत्री के आरोपों पर CM धामी ने उठाए बड़े सवाल, ऑडियो पर भी बोले

CM Dhami Slams Rekha: उत्तराखंड CM धामी ने रेखा आर्य के पति पर लगाए आरोपों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने 22 साल तक आरोप नहीं लगाने और वायरल ऑडियो की जांच पर भी बात की।

CM Dhami Slams Rekha: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने गुरुवार को अपनी कैबिनेट सहयोगी रेखा आर्य (Rekha Arya) और उनके पति गिरधारी लाल साहू (Girdhari Lal Sahu) के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। धामी ने रेखा आर्य की ओर से अपने पति पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन आरोपों की पृष्ठभूमि और इनके आधार की जांच जरूरी है।

मीडिया के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बिना रेखा आर्य का नाम लिए कहा कि दोनों 22 साल से साथ रह रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने लंबे समय तक आरोप क्यों नहीं लगाए गए और आज ही ये आरोप सामने क्यों आए हैं। धामी ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति की ओर से लगाए गए आरोपों की सच्चाई उचित जांच के बाद ही सामने आएगी।

22 साल बाद क्यों सामने आए आरोप?

रेखा आर्य ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शादी से पहले अपनी पहली शादी और उससे हुए बच्चों की जानकारी छिपाई थी। इसके अलावा उन्होंने पति पर जान से मारने की धमकी देने, मारपीट करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने इसी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर दोनों 22 साल से साथ रह रहे थे तो इतने वर्षों तक इन आरोपों का जिक्र क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि इन आरोपों की पृष्ठभूमि क्या है और इनके पीछे आधार क्या है।

शिकायत के बाद दर्ज हुई थी FIR

गौरतलब है कि रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर को देहरादून कैंटोनमेंट थाने (Dehradun Cantonment Police Station) में अपने पति के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद गिरधारी लाल साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

मामले में मंत्री को जान से मारने की धमकी देने, दूसरी शादी यानी द्विविवाह (Bigamy), धोखाधड़ी (Cheating), उत्पीड़न (Harassment), हिंसा करने समेत कई आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC-ST Act) के तहत भी कार्रवाई की गई है।

पहली शादी छिपाने और मारपीट का आरोप

रेखा आर्य का आरोप है कि गिरधारी लाल साहू ने उनसे शादी करते समय अपनी पहली शादी और उससे हुए बच्चों की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने अपने पति पर विवाहेतर संबंध (Extramarital Affairs) रखने का भी आरोप लगाया है।

रेखा आर्य का कहना है कि जब उन्होंने पति के कथित विवाहेतर संबंधों पर सवाल उठाया तो उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके सरकारी आवास पर कर्मचारियों के सामने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

फर्जी हस्ताक्षर और हत्या की साजिश का भी आरोप

मंत्री ने अपने पति पर एक कंपनी के निदेशक पद से उन्हें हटाने के लिए उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप जारी की थी, जिसमें उनके मुताबिक गिरधारी लाल साहू एक महिला से बात करते हुए उन्हें जान से मारने की साजिश की बात कर रहे थे।

शिकायत दर्ज होने के बाद गिरधारी लाल साहू कथित तौर पर भूमिगत हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

सरकार ने बनाई एसआईटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया है। एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

एसआईटी ने सोमवार शाम रेखा आर्य का बयान भी दर्ज कर लिया है। वहीं उनके पति के बारे में बताया जा रहा है कि वह अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

ऑडियो क्लिप पर भी धामी ने उठाया सवाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उस विवादित ऑडियो क्लिप की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए, जिसमें गिरधारी लाल साहू को कथित तौर पर एक महिला से बातचीत करते हुए और रेखा आर्य को जान से मारने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है।

धामी ने सवाल किया कि क्या सिर्फ किसी ऑडियो क्लिप में किसी का नाम सुनाई देना ही सबूत माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपराध करने वाला ही कानून की नजर में अपराधी होगा और कानून अपना काम कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी के आरोप लगाने भर से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति राजनीतिक फायदा उठाना चाहता है तो उसके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कानून की नजर में जो दोषी होगा, वही आरोपी माना जाएगा।

निष्पक्ष जांच पर धामी का जोर

धामी ने कहा कि पुलिस विवादित ऑडियो क्लिप की भी जांच कर रही है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे सार्वजनिक जीवन (Public Life) पर असर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था (Justice System), जांच एजेंसियों (Investigation Agencies) और पूरी प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने साफ कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।

धामी ने यह भी कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कानून के मुताबिक किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

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