उत्तराखंड में बनेंगे 20 नए छठ घाट, सीएम धामी ने आठ नगरों को दी सौगात
Pushkar Singh Dhami: उत्तराखंड में छठ महापर्व की तैयारियों और छठ व्रतियों की सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने राज्य के आठ नगरों में 20 नए छठ घाट बनाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही देहरादून और चंपावत जिले में भी छठ घाटों का निर्माण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भारत विकास परिषद की ओर से आयोजित 14वें दीपावली मेले में की। इस दौरान उन्होंने लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
Pushkar Singh Dhami: उत्तराखंड में छठ महापर्व की तैयारियों और छठ व्रतियों की सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने राज्य के आठ नगरों में 20 नए छठ घाट बनाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही देहरादून और चंपावत जिले में भी छठ घाटों का निर्माण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भारत विकास परिषद की ओर से आयोजित 14वें दीपावली मेले में की। इस दौरान उन्होंने लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
आठ नगरों में बनेंगे 20 नए छठ घाट
भारत विकास परिषद की ओर से तराई बीज विकास निगम मैदान में सोमवार देर शाम 14वें दीपावली मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया और छठ व्रतियों के लिए नई सुविधाओं की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि काशीपुर, जसपुर, रुद्रपुर, बाजपुर, गदरपुर, सितारगंज, खटीमा और किच्छा में कुल 20 नए छठ घाट बनाए जाएंगे। इन घाटों के निर्माण से स्थानीय श्रद्धालुओं को छठ पूजा के दौरान पूजा-अर्चना और अर्घ्य देने के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा देहरादून और चंपावत जिले में भी छठ घाटों के निर्माण की घोषणा की गई है। देहरादून के प्रेमनगर में टोंस नदी के दाहिने तट पर और विकासनगर के बाढ़वाला में यमुना नदी के किनारे छठ घाट बनाया जाएगा। वहीं, चंपावत जिले के बनबसा में भी छठ घाट का निर्माण कराया जाएगा।
भारत विकास परिषद के सामाजिक कार्यों की सराहना
दीपावली मेले को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने भारत विकास परिषद के सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि परिषद जैसे संगठन सेवा और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से समाज को एकजुट करने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसे संगठन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी से समाज में सेवा और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केदारनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण किया गया है। इसी तरह चारधाम की तर्ज पर मानसखंड के पौराणिक मंदिरों और धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर तथा मां शारदा के तट पर शारदा कॉरिडोर का काम करीब तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडी की स्थापना को भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का किया आह्वान
मुख्यमंत्री धामी ने नगरा तराई में आयोजित रामलीला में भी प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन धर्म, मर्यादा, त्याग और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। उनके जीवन से हमें कर्तव्य, अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान की सीख मिलती है। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों का हो रहा विकास
रामलीला कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि केदारखंड और मानसखंड के पौराणिक मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने के साथ उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखना है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी लोगों के साथ साझा की। दीपावली मेले में परिषद अध्यक्ष दीपक बत्रा, नीरज वर्मा, हरीश शर्मा, हरीश जोशी, विशाल गोयल, हरप्रीत सिंह, दलजीत सिंह खिंडा, सुनील रैदानी, सतीश गोयल और अचल शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री की छठ घाटों से जुड़ी घोषणाओं को तराई क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इन घाटों के निर्माण से छठ पर्व के दौरान पूजा-अर्चना के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।



