योगी सरकार के दीपोत्सव से स्थानीय कारीगरों को रोजगार, कुम्हार परिवारों को मिले लाखों के ऑर्डर
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दीपोत्सव अब केवल आस्था, परंपरा और भव्य आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और कुम्हार परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप दिए जाने से मिट्टी के दीयों की मांग में बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा लाभ उन परिवारों को मिल रहा है, जिनकी पीढ़ियां पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये बनाने का काम करती रही हैं। कभी रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने वाले इन परिवारों के युवा अब अपनी ही धरती पर हुनर के दम पर आजीविका कमा रहे हैं।
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दीपोत्सव अब केवल आस्था, परंपरा और भव्य आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और कुम्हार परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप दिए जाने से मिट्टी के दीयों की मांग में बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा लाभ उन परिवारों को मिल रहा है, जिनकी पीढ़ियां पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये बनाने का काम करती रही हैं। कभी रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने वाले इन परिवारों के युवा अब अपनी ही धरती पर हुनर के दम पर आजीविका कमा रहे हैं।
बड़े ऑर्डर से कुम्हार परिवारों की बढ़ी कमाई
अयोध्या के जयसिंहपुर गांव में दीपोत्सव की तैयारियां कुम्हार परिवारों के लिए खास मायने रखती हैं। गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि दीपोत्सव शुरू होने के बाद से उनका पूरा परिवार दीये बनाने के काम में जुटा रहता है। इस बार उन्हें एक लाख मिट्टी के दीये बनाने का ऑर्डर मिला था, जिसे समय पर तैयार कर पहुंचा दिया गया।
वहीं, गांव के राजेश प्रजापति को दो लाख दीये बनाने का ऑर्डर मिला। उनके परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस काम को पूरा करते हैं। राजेश के मुताबिक, पहले पूरे महीने में मुश्किल से 20 से 25 हजार रुपये की कमाई हो पाती थी, लेकिन अब दीपोत्सव के सीजन में ही लाखों रुपये की आमदनी का अवसर मिल रहा है।
इलेक्ट्रिक चाक से बढ़ी उत्पादन क्षमता
दीपोत्सव के लिए बड़ी संख्या में दीये तैयार करने में आधुनिक उपकरण भी कारीगरों की मदद कर रहे हैं। कुम्हार परिवारों को इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराए जाने से दीये बनाने के काम में तेजी आई है। पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक के मेल से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ दीयों की गुणवत्ता में सुधार करने में भी मदद मिल रही है। जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड और सोहावल के ड्योढ़ी जैसे गांवों में कुम्हार परिवार दीपोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। घरों में मिट्टी गूंथने, दीये बनाने और उन्हें सुखाने का काम लगातार चल रहा है। मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय कारीगरों को बड़े ऑर्डर हासिल करने के अवसर मिल रहे हैं।
30 लाख दीयों से जगमगाएगी राम की पैड़ी
अयोध्या में दसवें दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस बार 7 नवंबर को राम की पैड़ी पर 30 लाख दीये प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन की तैयारियों के तहत उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्वीन हो मेमोरियल पार्क में 17.64 लाख दीये घाट स्थित गोदाम में रखे गए हैं। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और विभिन्न स्वयंसेवी संगठन भी जुटे हुए हैं। व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को लगाया गया है। इतने बड़े स्तर पर होने वाले आयोजन से मिट्टी के दीयों की मांग और स्थानीय कारीगरों की भागीदारी को बढ़ावा मिल रहा है।
पारंपरिक मिट्टी कला को मिल रही नई पहचान
दीपोत्सव के विस्तार ने अयोध्या के कुम्हार परिवारों को अपनी पारंपरिक कला आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। बड़े ऑर्डर, बढ़ती मांग और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से कारीगर अपने काम को नए स्तर पर ले जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं को अपने गांव और शहर में ही काम करने का रास्ता मिल रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव को व्यापक स्वरूप दिए जाने से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों के लिए यह आयोजन उनकी कला, मेहनत और आजीविका को नई पहचान देने का अवसर बन रहा है।
कुल मिलाकर, अयोध्या का दीपोत्सव इस बार भी रोशनी और आस्था के साथ स्थानीय हुनर की चमक को सामने ला रहा है। राम की पैड़ी पर लाखों दीयों की लौ जहां उत्सव को भव्य बनाएगी, वहीं इन दीयों को बनाने वाले कुम्हार परिवारों के घरों में भी रोजगार और बेहतर आमदनी की उम्मीद जगाएगी।



