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सोने की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट! 10 ग्राम गोल्ड ₹15,000 तक हो सकता है सस्ता

Gold Price Today: सोने की चमक अब फीकी पड़ती नजर आ रही है। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के साथ नए शिखर पर पहुंचने वाला सोना अब लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे पहुंच चुकी हैं। इस साल अब तक सोने के भाव में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में उन लोगों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है, जो लंबे समय से सोना खरीदने का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की मौजूदा स्थिति के बीच मशहूर ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ा अनुमान जताया है। इसके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत में करीब 15 हजार रुपये से ज्यादा की कमी आ सकती है।

Gold Price Today: सोने की चमक अब फीकी पड़ती नजर आ रही है। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के साथ नए शिखर पर पहुंचने वाला सोना अब लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे पहुंच चुकी हैं। इस साल अब तक सोने के भाव में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में उन लोगों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है, जो लंबे समय से सोना खरीदने का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की मौजूदा स्थिति के बीच मशहूर ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ा अनुमान जताया है। इसके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत में करीब 15 हजार रुपये से ज्यादा की कमी आ सकती है।

दरअसल, सोना इस साल की शुरुआत में निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बना हुआ था। लगातार बढ़ती मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच इसकी कीमतों में जबरदस्त तेजी आई थी। जनवरी 2026 में सोने ने 5,500 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को भी पार कर लिया था। लेकिन अब बाजार की तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। लगातार मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय सर्राफा बाजार तक देखने को मिल रहा है।

नोमुरा का अनुमान, 3,500 डॉलर तक गिर सकता है सोना

सोने की कीमतों में आगे कितनी गिरावट आ सकती है, इसको लेकर निवेशकों की नजर अब ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों पर टिकी हुई है। इसी बीच नोमुरा ने अपने ताजा रिसर्च नोट में सोने की कीमतों को लेकर महत्वपूर्ण अनुमान पेश किया है। नोमुरा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव घटकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है।

फिलहाल सोना करीब 3,947 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस स्तर से 3,500 डॉलर तक पहुंचने का मतलब है कि कीमतों में करीब 11 फीसदी की अतिरिक्त गिरावट आ सकती है। यह अनुमान उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने सोने में निवेश किया है या आने वाले दिनों में खरीदारी की योजना बना रहे हैं।

अगर भारतीय बाजार के मौजूदा भाव को आधार मानकर गणना करें तो इस समय 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.39 लाख रुपये बताई जा रही है। इसमें अगर 11 फीसदी की गिरावट आती है तो सोना लगभग 15,290 रुपये तक सस्ता हो सकता है। इस हिसाब से 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.23 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है। हालांकि, यह कीमतों में संभावित गिरावट का अनुमान है, न कि निश्चित भविष्यवाणी। भारतीय बाजार में सोने के वास्तविक भाव पर डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, स्थानीय मांग और अन्य लागतों का भी असर पड़ता है।

लगातार मुनाफावसूली से सोने पर बढ़ा दबाव

सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में निवेशकों की मुनाफावसूली को माना जा रहा है। एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। निवेशक पहले की तेजी से मिले मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए सोने में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

लगातार बिकवाली के कारण सोना तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है। इसका मतलब है कि कम समय में कीमतों में काफी गिरावट आ चुकी है। हालांकि, इससे तुरंत तेजी लौटने की गारंटी नहीं मिलती। जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, सोने में टिकाऊ रिकवरी के लिए बाजार में नई खरीदारी का आना जरूरी है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार से सकारात्मक संकेत मिलने भी अहम होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निवेशकों का भरोसा दोबारा नहीं लौटता और बाजार में मजबूत खरीदारी नहीं आती, तब तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

अमेरिका के आर्थिक आंकड़े तय करेंगे सोने की अगली चाल

आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अहम भूमिका रहने वाली है। बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़ों, बेरोजगारी के स्तर और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर रहेगी। इन आंकड़ों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति का अंदाजा मिलेगा और यह भी समझने में मदद मिलेगी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकता है।

दरअसल, ब्याज दरों और सोने की कीमतों के बीच महत्वपूर्ण संबंध होता है। जब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है तो आमतौर पर सोने को समर्थन मिल सकता है। वहीं, ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से सोने पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि निवेशकों के लिए दूसरे ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो जाते हैं।

इसके अलावा डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती है। यही वजह है कि निवेशक अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संभावित फैसलों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

₹1.42 लाख का स्तर सोने के लिए अहम

घरेलू बाजार में सोने की तकनीकी स्थिति पर भी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, 10 ग्राम सोने के लिए 1.42 लाख रुपये का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषण में रेजिस्टेंस उस स्तर को कहा जाता है, जहां पहुंचने पर कीमतों को आगे बढ़ने में मुश्किल हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक सोना इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिककर कारोबार नहीं करता, तब तक निकट अवधि में तेजी की संभावनाएं सीमित रह सकती हैं। ऐसे में बाजार में खरीदारी करने वाले निवेशकों को कीमतों की चाल और तकनीकी स्तरों पर ध्यान देना होगा।

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव और ईरान पर वॉशिंगटन का रुख भी अहम

सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में वैश्विक राजनीति भी शामिल है। कोटक नियो की एवीपी कायनात चेनवाला के मुताबिक, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजे भी बाजार की दिशा पर असर डाल सकते हैं। इन चुनावों के बाद अमेरिका की नीतियों को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

इसके साथ ही ईरान को लेकर वॉशिंगटन का अगला रुख भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। अमेरिका की ऊर्जा नीति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की मांग में तेजी आ सकती है। वहीं, तनाव कम होने और बाजार में स्थिरता लौटने पर सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।

इस तरह आने वाले दिनों में अमेरिकी चुनाव, रोजगार के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की नीतियां और पश्चिम एशिया की परिस्थितियां सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

सोना खरीदने वालों के लिए क्या है संकेत?

सोने की कीमतों में लगातार गिरावट से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो आभूषण खरीदने या निवेश के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं। नोमुरा का अनुमान सही साबित होता है तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.23 लाख रुपये तक आ सकती है। हालांकि, बाजार में गिरावट कितनी होगी और यह कब तक जारी रहेगी, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

खरीदारों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत घटने का असर भारतीय बाजार में उसी अनुपात में तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है। डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना अब दबाव के दौर से गुजर रहा है। नोमुरा का 3,500 डॉलर प्रति औंस का अनुमान बाजार में आगे और गिरावट की संभावना दिखाता है। ऐसे में सोना खरीदने वालों और निवेशकों की नजर आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना 15 हजार रुपये से ज्यादा सस्ता होगा या बाजार में जल्द ही रिकवरी देखने को मिलेगी?

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