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धनतेरस पर सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, इस बार 12% तक बढ़ सकती है बिक्री

Dhanteras Gold Buying: धनतेरस का त्योहार आते ही भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की चमक बढ़ जाती है। मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदारी घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती है। यही वजह है कि सोने की कीमतें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, धनतेरस पर लोग अपनी क्षमता के मुताबिक कुछ न कुछ जरूर खरीदते हैं। इस बार भी बाजार में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल सकता है। सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद ज्वेलर्स को धनतेरस पर अच्छी खरीदारी की उम्मीद है।

Dhanteras Gold Buying: धनतेरस का त्योहार आते ही भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की चमक बढ़ जाती है। मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदारी घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती है। यही वजह है कि सोने की कीमतें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, धनतेरस पर लोग अपनी क्षमता के मुताबिक कुछ न कुछ जरूर खरीदते हैं। इस बार भी बाजार में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल सकता है। सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद ज्वेलर्स को धनतेरस पर अच्छी खरीदारी की उम्मीद है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, इस बार धनतेरस पर सोने की बिक्री पिछले साल के मुकाबले करीब 12 फीसदी तक बढ़ सकती है। इससे पहले संगठन ने बिक्री में 7 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था। वहीं, ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) को भी धनतेरस और दिवाली के दौरान सोने की बिक्री में करीब 10 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, इस बार ग्राहकों की खरीदारी का तरीका पहले जैसा नहीं रहने वाला है। महंगे सोने के चलते लोग भारी गहनों के बजाय हल्की ज्वेलरी, कम वजन के सिक्के और अपने बजट के हिसाब से सोना खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि जब सोना इतना महंगा है, तो फिर बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद क्यों जताई जा रही है?

सोने की कीमतों में उछाल, फिर भी बाजार में रौनक की उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 5 नवंबर को सोने की कीमत करीब 2 फीसदी बढ़कर दो सप्ताह के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इसके पीछे अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट प्रमुख वजह बताई जा रही है। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। जब डॉलर कमजोर होता है या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि कीमतों में तेजी के बावजूद सोने की मांग बनी हुई है। भारत में भी त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं रहती। धनतेरस और दिवाली पर लोग परंपरा, शुभता और भविष्य की बचत को ध्यान में रखकर सोना खरीदते हैं। यही वजह है कि ज्वेलर्स को इस बार भी बाजार में अच्छी रौनक की उम्मीद है।

भारी गहनों की जगह हल्की ज्वेलरी बन रही पसंद

सोने की बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों के बजट को जरूर प्रभावित किया है। पहले जहां लोग धनतेरस पर भारी हार, चेन या दूसरे बड़े गहने खरीदने की योजना बनाते थे, वहीं अब कम वजन के गहनों की ओर रुझान बढ़ रहा है। ग्राहक अब ऐसे डिजाइन पसंद कर रहे हैं, जिनमें कम सोना इस्तेमाल हो और कीमत भी उनके बजट में रहे। इसके अलावा छोटे सोने के सिक्कों और हल्की ज्वेलरी की मांग भी बढ़ सकती है। यानी लोग सोना खरीदने से पीछे नहीं हट रहे, बल्कि खरीदारी का तरीका बदल रहे हैं।

इस बदलाव का असर ज्वेलर्स के कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में संगठित क्षेत्र के ज्वेलर्स की सोने की बिक्री की मात्रा में पिछले साल की तुलना में 4 से 6 फीसदी की गिरावट आ सकती है। इससे पहले पिछले वित्त वर्ष में भी बिक्री की मात्रा में करीब 8 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद ज्वेलर्स की कमाई में 20 से 21 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। इसकी वजह सोने की ऊंची कीमतें हैं। यानी ग्राहक भले ही कम वजन का सोना खरीदें, लेकिन प्रति ग्राम कीमत ज्यादा होने के कारण ज्वेलर्स के कारोबार की कुल वैल्यू बढ़ सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा के मुताबिक, इस बार त्योहारों के दौरान सोने की मांग अच्छी रह सकती है। हालांकि, बिक्री की वैल्यू में बढ़ोतरी का बड़ा कारण सोने की कीमतें होंगी, न कि खरीदे जाने वाले सोने की मात्रा में इजाफा।

IBJA को पहले से ज्यादा बिक्री की उम्मीद

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, इस धनतेरस पर सोने की बिक्री में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। संगठन ने पहले 7 से 10 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया था, लेकिन बाजार से मिल रहे संकेतों के बाद इसे बढ़ाया गया है। उनका मानना है कि सोने की कीमतें बढ़ने के बावजूद लोग इसे सुरक्षित निवेश का विकल्प मानते हैं। वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने की अहमियत बनी हुई है। यही वजह है कि त्योहारों के दौरान ग्राहक सोने की खरीदारी को प्राथमिकता दे सकते हैं। अमेरिका में चुनावी घटनाक्रम और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध को लेकर बढ़ते दबाव का भी वैश्विक बाजार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि, इन घटनाओं का सोने की कीमतों पर वास्तविक असर बाजार की आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा।

ज्वेलर्स को 10% तक बिक्री बढ़ने की उम्मीद

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया को भी इस बार धनतेरस और दिवाली के दौरान सोने की बिक्री में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। उनके मुताबिक, बाजार में मांग के शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं। धनतेरस से पहले के करीब 20 दिनों में सोने की बिक्री और ग्राहकों की एडवांस बुकिंग से ज्वेलर्स को अच्छा कारोबार होने की उम्मीद मिली है। हालांकि, बिक्री की वास्तविक तस्वीर त्योहार का दिन खत्म होने के बाद ही साफ हो सकेगी। ज्वेलर्स के लिए एडवांस बुकिंग भी अहम संकेत है, क्योंकि इससे उन्हें पहले ही अंदाजा मिल जाता है कि ग्राहक किस तरह के गहनों और कितने बजट की खरीदारी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

इस बार सोने की खरीदारी का बदला हुआ ट्रेंड

इस धनतेरस पर बाजार की कहानी केवल महंगे सोने और बढ़ती बिक्री की नहीं है, बल्कि बदलते ग्राहक व्यवहार की भी है। एक तरफ सोने की कीमतें आम लोगों के बजट पर दबाव डाल रही हैं, तो दूसरी तरफ त्योहार और निवेश की परंपरा खरीदारी को बनाए हुए हैं। ग्राहक अब भारी गहनों के बजाय हल्के विकल्प चुन रहे हैं। ज्वेलर्स भी ग्राहकों के बजट को देखते हुए कम वजन और नए डिजाइन की ज्वेलरी पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में इस बार धनतेरस पर बाजार में बिक्री की कुल रकम बढ़ सकती है, भले ही सोने की वास्तविक मात्रा में उतनी बढ़ोतरी न हो।

कुल मिलाकर, इस धनतेरस पर सोने की चमक महंगाई के बावजूद फीकी पड़ती नहीं दिख रही। खरीदारी का तरीका जरूर बदल रहा है, लेकिन त्योहार पर सोना खरीदने का उत्साह अब भी बरकरार है।

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