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सर्बिया में छात्र आंदोलन का असर, राष्ट्रपति वुसिक को लगा बड़ा झटका

Serbia Election: सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव की खबर सामने आई है। लंबे समय से सत्ता में बने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली। उनके खिलाफ पिछले दो वर्षों से भ्रष्टाचार और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इस चुनाव में वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी और विश्वविद्यालय के छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।

Serbia Election: सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव की खबर सामने आई है। लंबे समय से सत्ता में बने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली। उनके खिलाफ पिछले दो वर्षों से भ्रष्टाचार और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इस चुनाव में वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी और विश्वविद्यालय के छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।

14 साल के वर्चस्व को चुनौती

बाल्कन क्षेत्र के देश सर्बिया में अलेक्जेंडर वुसिक लंबे समय से राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं। उनके नेतृत्व में सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) ने देश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखी। वुसिक को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीबी संबंधों के लिए भी जाना जाता है। लेकिन पिछले दो वर्षों में उनकी सरकार के खिलाफ विरोध तेज होता गया। इस बार चुनाव में उनके सामने विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन वाला आंदोलन था, जिसने भ्रष्टाचार, जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

छात्र आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन

सर्बिया में छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन सरकार के खिलाफ असंतोष का बड़ा केंद्र बन गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। चुनाव के दौरान भारी मतदान और बढ़ते राजनीतिक तनाव ने इस मुकाबले को और अहम बना दिया। छात्रों के समर्थन वाली ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ ने चुनाव में वुसिक की पार्टी को कड़ी चुनौती दी। वुसिक ने पहले इस आंदोलन को विदेशी ताकतों की साजिश बताया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने अपने अभियान में घरेलू शासन, भ्रष्टाचार और सरकारी जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर जोर दिया।

वुसिक ने खुद स्वीकार की हार

अपनी पार्टी के चुनावी कार्यक्रम में समर्थकों को संबोधित करते हुए अलेक्जेंडर वुसिक ने कहा, “स्टूडेंट्स लिस्ट जीत गई है।” उन्होंने अपनी पार्टी के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि छात्र समर्थित सूची को संसद में 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटें मिलने का अनुमान है। सर्बिया की संसद में कुल 250 सदस्य होते हैं। यदि ये अनुमान अंतिम परिणामों से मेल खाते हैं, तो यह देश की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि, अंतिम नतीजों की पुष्टि आधिकारिक चुनावी आंकड़ों से होना जरूरी है।
वुसिक ने अपनी पार्टी के प्रदर्शन के लिए स्वतंत्र मीडिया, कुछ यूरोपीय देशों के कथित हस्तक्षेप और अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ को जिम्मेदार ठहराया।

नोवी साद हादसे के बाद शुरू हुआ था विरोध

सर्बिया में सरकार विरोधी आंदोलन की पृष्ठभूमि में नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छतरी जैसी संरचना गिरने की घटना अहम रही। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद सुरक्षा मानकों, निर्माण कार्यों और सरकारी जवाबदेही को लेकर सवाल उठे। इसके बाद छात्रों और नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए, जो धीरे-धीरे व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच और व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की।

सर्बिया की राजनीति पर क्या होगा असर?

अलेक्जेंडर वुसिक की हार स्वीकार करने की खबर ने सर्बिया के राजनीतिक भविष्य को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। छात्र आंदोलन की चुनावी सफलता का असर संसद की संरचना, सरकार के गठन और देश की नीतियों पर पड़ सकता है। फिलहाल, अंतिम चुनाव परिणाम और आगे बनने वाली सरकार की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। यदि छात्र समर्थित सूची को बहुमत मिलता है, तो सर्बिया में शासन की जवाबदेही, भ्रष्टाचार विरोधी कदमों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित हो सकता है।

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