30 लाख दीप, 22 झांकियां और 2100 ड्रोन… ऐसा होगा अयोध्या का दीपोत्सव
Ayodhya Deepotsav 2026: रामनगरी अयोध्या एक बार फिर आस्था, संस्कृति और उत्सव के रंगों में सराबोर होने जा रही है। सरयू के पावन तट से लेकर श्रीराम जन्मभूमि परिसर तक दीपों की रोशनी बिखेरने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। मंदिरों की नगरी में पांच दिवसीय दीपोत्सव का आगाज होने जा रहा है। अगले पांच दिनों तक अयोध्या में केवल दीपों की चमक ही नहीं, बल्कि रामकथा, लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
Ayodhya Deepotsav 2026: रामनगरी अयोध्या एक बार फिर आस्था, संस्कृति और उत्सव के रंगों में सराबोर होने जा रही है। सरयू के पावन तट से लेकर श्रीराम जन्मभूमि परिसर तक दीपों की रोशनी बिखेरने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। मंदिरों की नगरी में पांच दिवसीय दीपोत्सव का आगाज होने जा रहा है। अगले पांच दिनों तक अयोध्या में केवल दीपों की चमक ही नहीं, बल्कि रामकथा, लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
इस बार दीपोत्सव का आयोजन अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक रंगों से भी सजेगा। पांच देशों की रामलीला मंडलियां प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन करेंगी। अलग-अलग देशों में रामकथा की परंपरा और प्रस्तुति के विविध रूप दर्शकों को देखने को मिलेंगे। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी लोक परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और संगीत के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत करेंगे।
राम की पैड़ी के 56 घाटों पर सजेंगे 30 लाख दीप
दीपोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण राम की पैड़ी के 56 घाटों पर होने वाला दीप प्रज्ज्वलन होगा। यहां करीब 30 लाख दीप जलाने की तैयारी की गई है। घाटों पर दीप पहुंच चुके हैं और उन्हें व्यवस्थित ढंग से सजाने का काम शुरू हो रहा है। सात नवंबर को दीपोत्सव का मुख्य आयोजन होगा। उस दिन जब हजारों-लाखों दीप एक साथ प्रज्ज्वलित होंगे, तो सरयू का तट रोशनी से नहा उठेगा।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और कर्मचारी जुटे हुए हैं। दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजाने से लेकर घाटों की व्यवस्था और प्रकाश की तैयारियों तक हर स्तर पर काम किया जा रहा है। बृहस्पतिवार से लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन भी शुरू हो जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भी जलेगा दीपों का प्रकाश
दीपोत्सव की रोशनी श्रीराम जन्मभूमि परिसर तक भी पहुंचेगी। मंदिर परिसर के पांच जोन में करीब एक लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाने की तैयारी है। परिसर के मंदिरों और प्रमुख स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। दीपों की रोशनी के बीच श्रद्धालुओं को रामनगरी के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का विशेष अनुभव मिलेगा। वहीं रामकथा पार्क सहित अन्य प्रमुख आयोजन स्थलों पर मंच, दर्शक दीर्घा, प्रकाश व्यवस्था और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोजन के अलग-अलग हिस्सों में कलाकारों की प्रस्तुतियां और रामायण से जुड़े कार्यक्रम दर्शकों को उत्सव से जोड़ेंगे।
2100 स्वदेशी ड्रोन दिखाएंगे आसमान में अद्भुत नजारा
इस बार दीपोत्सव में परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का भी खास मेल दिखाई देगा। आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में 2100 स्वदेशी ड्रोन का भव्य आकाशीय शो शामिल है। आसमान में रोशनी और आकृतियों के माध्यम से रामकथा से जुड़े दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा 30 प्रोजेक्शन और लेजर शो भी आयोजित होंगे, जिनके जरिए रामायण के प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। दीपोत्सव की शोभायात्रा में रामायण के सातों कांडों पर आधारित 22 झांकियां शामिल होंगी। इन झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और रामकथा के प्रमुख प्रसंगों को दर्शाया जाएगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह शोभायात्रा सांस्कृतिक आकर्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
2147 श्रद्धालु एक साथ करेंगे सरयू महाआरती
दीपोत्सव के दौरान सरयू तट पर महाआरती भी विशेष आकर्षण रहेगी। इसमें 2147 श्रद्धालुओं की ओर से एक साथ सरयू महाआरती किए जाने की तैयारी है। दीपों से सजे घाट, आरती की लौ और मंत्रोच्चार से सरयू तट पर भक्ति का वातावरण बनेगा। इसके साथ ही पांच देशों की रामलीला मंडलियां अपनी प्रस्तुतियों से अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहभागिता को दर्शाएंगी। आयोजन के दौरान 12 मंचों पर करीब 2500 कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं के जरिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान भी सामने आएगी।
हरित आतिशबाजी और पर्यावरण-अनुकूल आयोजन पर जोर
दीपोत्सव में पर्यावरण का ध्यान रखते हुए हरित आतिशबाजी को भी शामिल किया गया है। आयोजन को व्यवस्थित बनाने और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की भागीदारी रहेगी। इसके अलावा डिजिटल माध्यमों से भी लोगों को उत्सव से जोड़ने की तैयारी है। रील और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के जरिए लोग अपनी रचनात्मक भागीदारी दर्ज करा सकेंगे। रामनगरी में 13 थीम आधारित प्रवेश द्वार और 20 सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य आयोजन स्थलों को आकर्षक रूप देना और आगंतुकों को दीपोत्सव की यादों को संजोने का अवसर देना है।
आस्था, संस्कृति और तकनीक का संगम बनेगा दीपोत्सव
अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं रह गया है। यह आयोजन रामकथा, भारतीय लोक परंपराओं, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक को एक मंच पर लाने का अवसर बन रहा है। पांच दिनों तक रामनगरी में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विविध अनुभव मिलेंगे।
सात नवंबर को होने वाला मुख्य दीपोत्सव इस आयोजन का केंद्र रहेगा, जब राम की पैड़ी के 56 घाटों पर लाखों दीप प्रज्ज्वलित होंगे। सरयू तट की रोशनी, राम मंदिर की सजावट, रामलीला की प्रस्तुतियां, ड्रोन शो और सांस्कृतिक कार्यक्रम मिलकर अयोध्या को उत्सव के एक भव्य दृश्य में बदल देंगे। रामनगरी एक बार फिर दीपों की चमक के साथ अपनी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाने के लिए तैयार है।



