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इमरान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत, भारत छोड़ने के नोटिस पर रोक बरकरार

Imran Khan: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए जारी किए गए फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के नोटिस के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ (LIN) पर लगी रोक को आगे भी जारी रखने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड धारक को भारतीय नागरिकों के समान अधिकार प्राप्त नहीं हैं। साथ ही अदालत ने इमरान खान को अपना जवाब दाखिल करने, अंडरटेकिंग देने और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है।

Imran Khan: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए जारी किए गए फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के नोटिस के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ (LIN) पर लगी रोक को आगे भी जारी रखने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड धारक को भारतीय नागरिकों के समान अधिकार प्राप्त नहीं हैं। साथ ही अदालत ने इमरान खान को अपना जवाब दाखिल करने, अंडरटेकिंग देने और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इमरान खान को FRRO के नोटिस पर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जब तक संबंधित अधिकारी उनका पक्ष सुनकर कोई फैसला नहीं लेते, तब तक भारत छोड़ने के नोटिस पर लगी रोक जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।

28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का मिला था नोटिस

दरअसल, मुंबई के FRRO ने अभिनेता इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ इमरान खान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल कर FRRO के फैसले को चुनौती दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान FRRO की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया था कि 2 नवंबर तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी मामले में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने नोटिस जारी किए जाने की परिस्थितियों और विरोध प्रदर्शन में अभिनेता की कथित भूमिका पर सवाल उठाए। कोर्ट ने इमरान खान से पूछा कि वे SIR के विरोध प्रदर्शन में क्यों शामिल हुए थे और इस प्रदर्शन से उनका क्या संबंध था।

SIR प्रदर्शन में शामिल होने पर कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि SIR के मुद्दे से इमरान खान का प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि OCI कार्ड धारक भारतीय नागरिक नहीं होते और उन्हें भारतीय नागरिकों के समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। ऐसे में उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि प्रदर्शन के आयोजकों या प्रदर्शनकारियों से उनका कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने इमरान खान से इस संबंध में स्पष्ट अंडरटेकिंग देने को कहा। अदालत का कहना था कि उन्हें यह भी आश्वासन देना होगा कि भविष्य में वे इस तरह के किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित या उकसाएंगे।

इमरान के वकील ने रखी अपनी दलील

इमरान खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल का प्रदर्शन के आयोजकों या प्रदर्शनकारियों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि इमरान खान का जन्म भारत में हुआ था और उन्होंने अपनी जिंदगी के ज्यादातर साल यहीं बिताए हैं। हालांकि, वे अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास OCI कार्ड है। वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि इमरान खान भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा वे किसी दूसरे व्यक्ति को भी ऐसे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नहीं उकसाएंगे।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इमरान खान को बिना शर्त माफी भी मांगनी होगी। अदालत ने टिप्पणी की कि एक सेलिब्रिटी होने के नाते उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। ऐसे में उनके किसी भी बयान या गतिविधि का समाज पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्हें अपनी सार्वजनिक जिम्मेदारी को समझना चाहिए और ऐसे किसी भी बयान या गतिविधि से बचना चाहिए, जिससे लोगों को उकसावा मिल सकता हो।

कोर्ट ने कहा- सेलिब्रिटी होने के नाते जिम्मेदारी समझें

सुनवाई के दौरान अदालत ने इमरान खान के भारत से जुड़ाव का भी उल्लेख किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि अभिनेता ने भारत में रहकर काम किया है और यहीं से उन्हें पहचान मिली है। ऐसे में उनसे अधिक जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की सार्वजनिक पहचान और उसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब उसके सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हों। कोर्ट ने इमरान खान को निर्देश दिया कि वे अपनी ओर से स्पष्ट करें कि उनका प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं था और भविष्य में भी वे इस तरह की गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे।

केंद्र सरकार ने याचिका का किया विरोध

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इमरान खान की याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि अभिनेता ने सोशल मीडिया पोस्ट और इंटरव्यू के माध्यम से लोगों को उकसाने का प्रयास किया है। सरकार की ओर से कहा गया कि OCI कार्ड धारक को भारत में रहने का असीमित अधिकार नहीं मिलता। उन्हें भारतीय नागरिकों के समान सभी मौलिक अधिकार भी हासिल नहीं हैं। विदेशी नागरिकों और OCI कार्ड धारकों के मामले में सरकार के पास कानून के तहत कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार हैं। सरकार का पक्ष था कि इमरान खान की गतिविधियों को देखते हुए FRRO की ओर से जारी नोटिस को गलत नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने मामले के दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई।

कोर्ट ने कहा- बिना पक्ष सुने आदेश देना उचित नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि OCI कार्ड धारकों को भारतीय नागरिकों के बराबर अधिकार प्राप्त नहीं हैं। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे समय से भारत में रह रहे किसी व्यक्ति के खिलाफ उसका पक्ष सुने बिना इस तरह का आदेश पारित करना उचित नहीं है। चीफ जस्टिस ने सवाल उठाया कि अगर महाराष्ट्र पुलिस की जांच में आगे चलकर इमरान खान के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलता है, तो ऐसी स्थिति में क्या होगा? अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए। इस दौरान चीफ जस्टिस ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इमरान खान को इतने वर्षों तक अपनाया है और उन्हें यहां काम करने तथा अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया है। ऐसे में सरकार को भी बड़ा दिल दिखाते हुए मामले में उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

7 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने अपने आदेश में इमरान खान को FRRO के नोटिस पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही उन्हें अंडरटेकिंग और बिना शर्त माफी भी पेश करनी होगी। FRRO को निर्देश दिया गया है कि वह अभिनेता का पक्ष सुनने के बाद मामले में उचित निर्णय ले। फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट ने इमरान खान को राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी लीव इंडिया नोटिस पर लगी रोक को जारी रखा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। उस दिन अदालत के सामने अभिनेता की ओर से दाखिल जवाब, अंडरटेकिंग और माफी के साथ-साथ FRRO की आगे की कार्रवाई से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है।

इस पूरे मामले में एक ओर OCI कार्ड धारकों के अधिकारों और उनकी जिम्मेदारियों को लेकर अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आई हैं, वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।

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