तिब्बत में 7 की तीव्रता वाले भूकंप ने मचाई तबाही : 16 लोगों की मौत, 340 घर जमींदोज… मलबे में तब्दील हुआ नागकू शहर
Tibet Earthquake: पठारी देश तिब्बत से एक बड़ी और दहला देने वाली खबर सामने आई। तिब्बत में आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं, जबकि सैकड़ों घर मलबे में तब्दील हो गए हैं, आइए जानते हैं इस बड़ी आपदा की पूरी रिपोर्ट।
Tibet Earthquake: पठारी देश तिब्बत से एक बड़ी और दहला देने वाली खबर सामने आई। तिब्बत में आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं, जबकि सैकड़ों घर मलबे में तब्दील हो गए हैं, आइए जानते हैं इस बड़ी आपदा की पूरी रिपोर्ट।
तिब्बत में भीषण भूकंप का तांडव
पठारी देश तिब्बत में आए एक जोरदार भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7 मापी गई, जिसके तेज और भयानक झटकों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पिछले 5 सालों में तिब्बत में आया यह सबसे बड़ा भूकंप बताया जा रहा है।
जान-माल का भारी नुकसान
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 45 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत नाजुक बनी हुई है। भूकंप का सबसे भयंकर असर नागकू शहर में देखने को मिला, जहां लगभग 340 घर ढह गए और सैकड़ों लोग बेघर हो गए। विस्थापित हुए लोगों के लिए राहत शिविरों (टेंट) की व्यवस्था की गई है।
भूकंप का केंद्र और गहराई
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र राजधानी ल्हासा के नागकू शहर से 191 किलोमीटर दूर पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में बाकेन काउंटी में था। जमीन से इसकी गहराई 18 किलोमीटर नीचे थी। यह भूकंप स्थानीय समयानुसार रात करीब साढ़े 10 बजे आया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन में आई मुश्किलें
नागकू के अलावा बाकेन, कमदो और न्यिंगची शहरों में भी तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप के कारण प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई और पहाड़ों से चट्टानें (Landslide) खिसककर सड़कों पर आ गईं, जिससे रास्ते बंद हो गए। ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाके होने के कारण राहत कर्मियों को मौके पर पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, हालांकि प्रशासनिक टीमों, पुलिस और दमकल वाहनों की मदद से बचाव कार्य तेजी से चलाया गया।
क्यों कांपता है तिब्बत?
वैज्ञानिकों के अनुसार, तिब्बत भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों पर बसा हुआ है। करीब 50 मिलियन वर्ष पहले भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसककर यूरेशियाई प्लेट से टकराई थी। आज भी ये दोनों प्लेट्स आपस में टकरा रही हैं और हर साल 50-60 मिमी की स्पीड से भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है। इस निरंतर घर्षण और दबाव के कारण धरती के भीतर भारी तनाव पैदा होता है, जिसकी वजह से ऊर्जा रिलीज होने पर तेज भूकंप आते हैं।
तिब्बत में आई इस आपदा ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।



