धीरेंद्र शास्त्री और अखिलेश यादव आमने-सामने, कुंडा में राजा भैया की रामकथा पर विवाद
UP Politics: उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रस्तावित सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है। भगवान राम और भगवान कृष्ण से जुड़ी कथित विवादित टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से अपील की है कि धीरेंद्र शास्त्री को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में होने वाले आयोजनों की अनुमति न दी जाए। इस विवाद में प्रतापगढ़ के कुंडा का कार्यक्रम भी चर्चा में आ गया है, जहां जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष और विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की ओर से श्रीराम कथा आयोजित की जानी है।
UP Politics: उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रस्तावित सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है। भगवान राम और भगवान कृष्ण से जुड़ी कथित विवादित टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से अपील की है कि धीरेंद्र शास्त्री को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में होने वाले आयोजनों की अनुमति न दी जाए। इस विवाद में प्रतापगढ़ के कुंडा का कार्यक्रम भी चर्चा में आ गया है, जहां जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष और विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की ओर से श्रीराम कथा आयोजित की जानी है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अंबेडकरनगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा में नवंबर-दिसंबर के दौरान प्रस्तावित कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले किसी भी विवादित व्यक्ति को सार्वजनिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनकी इस अपील के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
‘न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में’, अखिलेश की तीखी प्रतिक्रिया
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े कथित विवादित वीडियो को लेकर अखिलेश यादव ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कथावाचक की टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब उन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न अवध में। अखिलेश ने यह भी कहा कि कोई सच्चा रघुवंशी या यदुवंशी उनका स्वागत नहीं करेगा। सपा प्रमुख ने अपनी प्रतिक्रिया में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के साथ नेपाल बॉर्डर पर भी ‘ईशनिंदा करने वालों का प्रवेश वर्जित है’ जैसे नाकाबंदी बोर्ड लगाने की टिप्पणी की। उनके इस बयान ने विवाद को और चर्चा में ला दिया। अखिलेश यादव ने यह सवाल भी उठाया कि राजनीतिक टकराव में भगवान को बीच में क्यों लाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने की कोशिश की जा रही है।
छह जिलों में प्रस्तावित कार्यक्रमों को अनुमति न देने की अपील
बुधवार शाम को अखिलेश यादव ने इस मामले में अपनी आपत्ति का दायरा बढ़ाते हुए प्रदेश के कई जिलों में प्रस्तावित सार्वजनिक आयोजनों का जिक्र किया। उन्होंने शासन और प्रशासन से अपील की कि अंबेडकरनगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा में नवंबर और दिसंबर के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में ऐसे किसी भी व्यक्ति को अनुमति न दी जाए, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका हो। सपा प्रमुख ने कथावाचकों की बयानबाजी को लेकर आयोजकों और प्रायोजकों को भी चेतावनी दी। उनका कहना है कि विवादित बयान देने वाले लोग कार्यक्रम के बाद चले जाएंगे, लेकिन जनता का आक्रोश आयोजकों और प्रायोजकों को झेलना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ऐसी टिप्पणियों को आयोजकों की मौन सहमति के रूप में भी देख सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को सार्वजनिक आयोजनों में आमंत्रित करने से बचना चाहिए।
कुंडा में 17 से 19 नवंबर तक राजा भैया की पार्टी कराएगी श्रीराम कथा
इस पूरे विवाद में कुंडा का कार्यक्रम खास चर्चा में है। प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) की ओर से 17 से 19 नवंबर तक तीन दिवसीय श्रीराम कथा आयोजित करने की योजना है। इस कार्यक्रम में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शामिल होंगे। इस आयोजन की वजह से मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि कार्यक्रम का आयोजन कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पार्टी करा रही है। अखिलेश यादव की प्रशासन से अनुमति न देने की अपील के बाद अब इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन के रुख पर नजरें टिकी हैं। हालांकि, अखिलेश यादव की मांग और प्रशासन के किसी आधिकारिक फैसले के बीच अंतर है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रस्तावित आयोजनों पर रोक लगाने या उनकी अनुमति रद्द करने का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
आयोजकों और प्रायोजकों को लेकर भी अखिलेश ने उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया संदेश में केवल कथावाचकों की बयानबाजी पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराने वालों की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले विवादित बयानों का असर समाज पर पड़ सकता है। ऐसे में आयोजकों को भी वक्ताओं के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति भगवान या धार्मिक मान्यताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो उसका विरोध केवल उसी व्यक्ति तक सीमित नहीं रह सकता। कार्यक्रम के आयोजकों और प्रायोजकों के प्रति भी लोगों में नाराजगी पैदा हो सकती है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर अखिलेश यादव की अपील के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। खासकर कुंडा में राजा भैया की पार्टी की ओर से आयोजित होने वाली श्रीराम कथा को लेकर मामला चर्चा में है।
एक तरफ अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन से सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति न देने की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन का आधिकारिक रुख सामने आना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन आयोजनों के संबंध में क्या निर्णय लेता है और संबंधित राजनीतिक दल इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।



