पीएम मोदी ने ओडिशा में किया RBI के नए डेटा सेंटर का उद्घाटन, साइबर सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
RBI Data Centre: डिजिटल इंडिया के दौर में बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में भारत ने एक और अहम कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के जटनी में भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नए ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। भुवनेश्वर के पास इन्फोवैली-II में तैयार यह अत्याधुनिक परिसर देश के डिजिटल वित्तीय ढांचे को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और साइबर सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों के बीच यह परियोजना तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
RBI Data Centre: डिजिटल इंडिया के दौर में बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में भारत ने एक और अहम कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के जटनी में भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नए ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। भुवनेश्वर के पास इन्फोवैली-II में तैयार यह अत्याधुनिक परिसर देश के डिजिटल वित्तीय ढांचे को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और साइबर सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों के बीच यह परियोजना तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ परिसर
ओडिशा के जटनी क्षेत्र में स्थापित RBI का नया डेटा सेंटर करीब 18.55 एकड़ में फैला है। इस परियोजना पर लगभग 169 से 170 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। परिसर में चार आधुनिक डेटा सेंटर बनाए गए हैं, जिनका उपयोग RBI के महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम और भुगतान एवं सेटलमेंट से जुड़ी सेवाओं को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा। आज बैंकिंग व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो रही है। ग्राहक मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, UPI और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से लेन-देन कर रहे हैं। ऐसे में इन सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए मजबूत सर्वर, नेटवर्क और सुरक्षित डेटा स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होती है। RBI का नया डेटा सेंटर इसी तकनीकी जरूरत को पूरा करने में मदद करेगा।
डिजिटल बैंकिंग को मिलेगी मजबूती
डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ वित्तीय संस्थानों के सामने डेटा की उपलब्धता, सिस्टम की विश्वसनीयता और सेवाओं को लगातार चालू रखने जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। किसी तकनीकी खराबी, बिजली आपूर्ति में रुकावट या अन्य परिचालन संबंधी समस्या के कारण डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में आधुनिक डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां बड़े सर्वर, स्टोरेज डिवाइस और नेटवर्किंग उपकरणों के जरिए डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है और जरूरी सिस्टम को संचालित करने में मदद मिलती है। RBI का यह नया परिसर महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं को सपोर्ट करने के साथ तकनीकी व्यवधानों से उबरने की क्षमता बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। इस तरह की सुविधाएं वित्तीय व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने और जरूरी डिजिटल सेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए अहम हैं।
Tier IV सर्टिफिकेशन से लैस है डेटा सेंटर
RBI के नए डेटा सेंटर को Uptime Institute का Tier IV सर्टिफिकेशन मिला है। डेटा सेंटर के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यह सबसे ऊंची टियर श्रेणी है। इस श्रेणी में बिजली आपूर्ति, कूलिंग और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों में अतिरिक्त बैकअप तथा खराबी की स्थिति में काम जारी रखने के लिए मजबूत व्यवस्थाओं पर जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक उपकरण या सिस्टम में खराबी आने पर भी डेटा सेंटर का संचालन यथासंभव प्रभावित न हो। इससे महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता और परिचालन संबंधी विश्वसनीयता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, Tier IV सर्टिफिकेशन का अर्थ यह नहीं है कि डेटा सेंटर पर कभी साइबर हमला नहीं हो सकता। यह मुख्य रूप से उसके भौतिक और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती तथा संचालन की निरंतरता से जुड़ा है। साइबर सुरक्षा के लिए अलग से मजबूत सुरक्षा प्रणालियों, निगरानी और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जरूरत होती है।
साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी शुरू
इस परियोजना की एक बड़ी विशेषता डेटा सेंटर के साथ साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना है। डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर धोखाधड़ी, डेटा चोरी, नेटवर्क पर हमले और डिजिटल सिस्टम को निशाना बनाने वाली गतिविधियों से निपटना वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में साइबर सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना और नई तकनीकों के बारे में जानकारी देना जरूरी है। इस संस्थान में साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और उभरती तकनीकों से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने की योजना है।
AI और क्वांटम कंप्यूटिंग पर भी रहेगा जोर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल डेटा का विश्लेषण करने, असामान्य गतिविधियों की पहचान करने और संभावित साइबर खतरों का पता लगाने में किया जा सकता है। वहीं, क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य में कंप्यूटिंग और डेटा सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों के साथ नई चुनौतियां भी पेश कर सकती है। इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण और अनुसंधान से वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों को बदलते तकनीकी माहौल के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन तकनीकों के वास्तविक लाभ उनके इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों और संस्थागत तैयारियों पर निर्भर करेंगे।
नवी मुंबई के डेटा सेंटर को मिलेगा अतिरिक्त सहयोग
RBI का नवी मुंबई में पहले से एक प्रमुख डेटा सेंटर मौजूद है। ओडिशा में नई सुविधा शुरू होने से केंद्रीय बैंक के महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अतिरिक्त सहयोग मिल सकता है। अलग-अलग स्थानों पर तकनीकी सुविधाएं होने से डेटा प्रबंधन, सिस्टम की उपलब्धता और आपदा या गंभीर तकनीकी व्यवधान के दौरान सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की रणनीतियों को मजबूती मिल सकती है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ओडिशा में RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम है। करीब 170 करोड़ रुपये की लागत और अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस यह परिसर डिजिटल बैंकिंग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में योगदान दे सकता है। अब बदलते डिजिटल दौर में चुनौती सिर्फ तेज भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, भरोसेमंद और लगातार चालू रखने की भी है। ऐसे में यह परियोजना भारत की वित्तीय तकनीक और साइबर सुरक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।



