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तिहाड़ से बाहर आएंगे CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका, मिली जमानत, जानिए क्या हैं शर्तें?

CJP Leaders Release: सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में 21 अक्टूबर को तिहाड़ जेल से रिहाई मिली। जानिए कोर्ट की जमानत शर्तें और अगली सुनवाई की तारीख।

CJP Leaders Release: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के लिए तिहाड़ जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है! दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों नेताओं को बड़ी राहत देते हुए 21 अक्टूबर को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत और बढ़ाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने पुलिस की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने किन शर्तों पर दी है जमानत।

सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ से राहत

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक सौरव दास और नेता आशुतोष रांका को आखिरकार तिहाड़ जेल से बड़ी राहत मिल गई है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने 21 अक्टूबर को दोनों नेताओं को रिहा करने का आदेश दे दिया है। हालांकि, यह रिहाई कुछ कड़ी शर्तों और नियमों के अधीन की गई है।

क्यों हुई थी गिरफ्तारी?

आपको बता दें कि 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में घुसने, बैरिकेडिंग पार करने और पहले से दिए गए शांति बॉन्ड (Peace Bond) की शर्तों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप था। 14 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा था, जिसे बाद में 19 अक्टूबर को दो दिन और बढ़ा दिया गया था। यह अवधि 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी।

दिल्ली पुलिस को कोर्ट से झटका

21 अक्टूबर को जब दोनों नेताओं को दोबारा SEM कोर्ट में पेश किया गया, तो दिल्ली पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की पुरजोर मांग की। लेकिन कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट का मानना था कि जब आरोपियों ने जरूरी शर्तें पूरी कर दी हैं, तो उन्हें आगे हिरासत में रखने की कोई जरूरत नहीं है।

जमानत के लिए कोर्ट ने रखीं ये कड़ी शर्तें

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए कोर्ट ने कुछ अहम और सख्त शर्तें तय की हैं:

दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके की शर्त पूरी करनी पड़ी और साथ ही अपने जमानतदार (Surety) भी पेश करने पड़े।

दोनों ने कोर्ट को लिखित भरोसा दिया है कि वे भविष्य में किसी भी तरह से शांति भंग नहीं करेंगे और कानून-व्यवस्था का पूरा सम्मान करेंगे।

जब तक जंतर-मंतर को कानूनी रूप से दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, वे वहां लोगों को प्रदर्शन के लिए नहीं बुलाएंगे।

भविष्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाएगा।

मामले की अगली हर तारीख पर दोनों नेताओं को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।

कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक जमानतदारों की पूरी जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करे।

हाईकोर्ट पहुंचे थे दोनों नेता

आपको बता दें SEM कोर्ट में सुनवाई से पहले सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी अवैध हिरासत को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें निचली अदालत (SEM कोर्ट) की प्रक्रिया का इंतजार करने की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली थी।

मजिस्ट्रेट को धमकी पर भी जांच जारी

वहीं इस पूरे प्रकरण के दौरान एक सनसनीखेज बात यह भी सामने आई कि इस मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी दी गई थी। इस मामले में रिपोर्टर के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसकी जांच की जा रही है।

जरूरी नोट: कोर्ट के इस आदेश का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दोनों नेता इस मामले में पूरी तरह बरी हो गए हैं। यह फिलहाल न्यायिक हिरासत से रिहाई का आदेश है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे तय की गई है, जिस दिन पुलिस को जमानतदारों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।

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