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जामिया से JNU तक ‘Free Kashmir’ और ‘Free Umar’ पर बवाल! विवादित नारों के पीछे की पूरी Inside Story

Free Kashmir Row: जामिया से JNU तक ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’ और ‘Free Umar Khalid’ के नारों पर विवाद बढ़ा। जानिए कहां क्या लिखा गया, क्या कार्रवाई हुई और नेताओं की क्या प्रतिक्रिया आई।

Free Kashmir Row: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) से शुरू हुआ छात्र आंदोलन (Student Protest) अब ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’ और ‘Free Umar Khalid’ जैसे विवादित नारों (Controversial Slogans) तक पहुंच गया है। सबसे ताजा मामला शनिवार 24 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का है, जहां दीवारों पर ‘Free Umar Khalid’ और ‘Long Live Naxalbari’ लिखा मिला। 

JNU प्रशासन (JNU Administration) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। लेकिन इससे जामिया में शुक्रवार को ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’, ‘Free Palestine’, ‘RSS Go Back’ और ‘VC Go Back’ जैसे नारों के मामले सामने आए। जहां दीवारों पर ये नारे लिखे गए थे और इनकी फोटो-वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए जिसके बाद इसको लेकर राजनीतिक घमासान (Political Controversy) और तेज हो गया है।

लेकिन इस पूरे विवाद को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि जामिया में आंदोलन इन नारों से शुरू नहीं हुआ था। असल आंदोलन की शुरुआत छात्रसंघ (Students’ Union) की बहाली और चुनाव (Student Union Elections) की मांग को लेकर हुई थी। बाद में दीवारों पर लिखे गए विवादित नारों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय राजनीति (National Politics) के केंद्र में ला दिया।

सबसे पहले जामिया में क्या चल रहा था?

गौरतलब हो कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों का आंदोलन (Student Movement) 12 अक्टूबर 2026 से चल रहा है। छात्रों की मुख्य मांग जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल करना और 2026-27 के लिए चुनाव (Election Schedule) की तारीख घोषित करना है।

जामिया में आखिरी छात्रसंघ चुनाव (Students’ Union Election) 2005 में हुए थे। इसके बाद 2006 में छात्रसंघ को भंग कर दिया गया था। करीब दो दशक से चुनाव नहीं होने को लेकर छात्र अब लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पांच छात्रों ने 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Indefinite Hunger Strike) शुरू की थी।

छात्रों का कहना है कि चुना हुआ छात्रसंघ (Elected Students’ Union) उनके मुद्दों को प्रशासन के सामने लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का माध्यम है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन (University Administration) का कहना है कि छात्रसंघ की बहाली के लिए जामिया एक्ट (JMI Act), कोर्ट के आदेश और 2007 की लिंगदोह समिति (Lyngdoh Committee) की सिफारिशों के मुताबिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

12 अक्टूबर से भूख हड़ताल, फिर बढ़ता गया तनाव

वहीं इस बीच 12 अक्टूबर को छात्रों ने गालिब लॉन (Ghalib Lawns) में भूख हड़ताल शुरू की। छात्र चुनाव की तारीख तत्काल घोषित करने की मांग पर अड़े रहे। आंदोलन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) और प्रदर्शन को सीमित करने की कोशिश के आरोप भी लगाए।

17 अक्टूबर को तनाव उस समय बढ़ा जब प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को गालिब लॉन के इलाके से हटाने की कोशिश की गई। इसके बाद छात्र संगठनों (Student Organisations) का समर्थन आंदोलन को मिलने लगा और मामला धीरे-धीरे बड़ा होता गया।

18 अक्टूबर को बनी सात सदस्यीय समिति

लगातार बढ़ते आंदोलन को देखते हुए 18 अक्टूबर को जामिया प्रशासन (JMI Administration) ने सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee) बनाई। इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करना, उनकी शिकायतें सुनना और सामान्य स्थिति (Normalcy) बहाल करने का रास्ता निकालना था। 19 और 20 अक्टूबर को छात्रों और समिति के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

21 अक्टूबर को प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम

वहीं 21 अक्टूबर को जामिया ने छात्रसंघ (Students’ Union) का संविधान (Constitution) तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति (Five-Member Committee) बनाने की घोषणा की। समिति को यह देखने की जिम्मेदारी दी गई कि 2006 में छात्रसंघ क्यों भंग हुआ था, उस समय की परिस्थितियां क्या थीं, अदालतों के क्या आदेश रहे हैं और लिंगदोह समिति की सिफारिशें किस तरह लागू हो सकती हैं।

समिति को 20 दिसंबर 2026 तक संविधान का ड्राफ्ट (Draft Constitution) तैयार करना है। प्रशासन ने यह भी कहा कि 12 से 21 अक्टूबर के बीच प्रदर्शन को लेकर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा (Review) की जाएगी।

लेकिन छात्रों ने इसे पर्याप्त नहीं माना। उनकी मांग थी कि चुनाव की तारीख (Election Date) तुरंत घोषित की जाए। उनका कहना था कि दिसंबर तक संविधान तैयार करने की प्रक्रिया चुनाव को और आगे खींच सकती है।

22 अक्टूबर को विरोध का नया रूप

वहीं 22 अक्टूबर को जामिया के लॉ विभाग (Law Department) के छात्रों ने ब्लैक कोट मार्च (Black Coat March) निकाला। इस दौरान भी छात्रसंघ चुनाव की मांग प्रमुख रही। आंदोलन अब कई दिनों से लगातार चल रहा था और विश्वविद्यालय के अंदर तनाव बढ़ रहा था। यही वह माहौल था जिसमें अगले दिन दीवारों पर विवादित लिखावट सामने आई।

जामिया की दीवारों पर लिखे मिले विवादित नारे

23 अक्टूबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर (Campus) की कुछ दीवारों पर विवादित लिखावट (Graffiti) की तस्वीरें सामने आईं। इनमें ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’, ‘Free Palestine’, ‘RSS Go Back’ और ‘VC Go Back’ जैसी लिखावट बताई गई। कुछ रिपोर्टों में ‘Death to ABVP’ और ‘Death to RSS’ जैसे संदेशों का भी उल्लेख है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात है।रिपोर्ट्स में इन लिखावटों को जामिया परिसर की दीवारों और कुछ जगहों पर बाउंड्री वॉल (Boundary Wall) पर बताया गया है। इन तस्वीरों को सबसे पहले प्रमुखता से सामने लाने वालों में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल भी शामिल थे। उन्होंने X पर तस्वीरें साझा करते हुए विश्वविद्यालय और पुलिस से जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की। हालांकि PTI ने कहा कि तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी थी।

जामिया प्रशासन ने क्या किया?

जामिया प्रशासन (Jamia Administration) ने दीवारों पर लिखे इन नारों की कड़ी निंदा की। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि यह परिसर की गरिमा (Dignity), संस्थान की संस्कृति और देश की अखंडता (National Integrity), सुरक्षा (Security) तथा संप्रभुता (Sovereignty) के लिहाज से गंभीर मामला है।

प्रशासन ने जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की बात कही। दीवारों से लिखावट हटाने के लिए केमिकल (Chemical Cleaning) का इस्तेमाल किया गया और प्रभावित जगहों को दोबारा रंगने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिन इलाकों में लिखावट मिली, वहां कुछ CCTV कैमरों (CCTV Cameras) के तार टूटे या क्षतिग्रस्त मिले हैं।

हालांकि 24 अक्टूबर तक किसी व्यक्ति की आधिकारिक गिरफ्तारी या यह पुष्टि सामने नहीं आई कि ये नारे किसने लिखे थे।

छात्रों ने कहा- हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

वहीं जामिया आंदोलन (Jamia Protest) कर रहे छात्रों ने इन नारों से खुद को अलग कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्रसंघ चुनाव (Student Union Election) की मांग को लेकर है और ‘Free Kashmir’ या ‘Free Sharjeel Imam’ जैसी लिखावट का उनके आंदोलन से कोई संबंध नहीं है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश भी बताया और कहा कि अगर प्रशासन के पास CCTV है तो फुटेज देखकर पता लगाया जाए कि लिखावट किसने की।

यानी अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि जामिया के छात्र आंदोलनकारियों ने ही ये नारे लिखे थे।

जामिया पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद

वहीं 23 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद (Congress MP) इमरान मसूद प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने जामिया पहुंचे। पुलिस ने बाद में उन्हें हिरासत (Detention) में ले लिया। उनके अलावा समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी भी छात्रों से मिलने पहुंचे और उन्हें भी हिरासत में लिया गया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। कुल करीब 10 लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। यहीं से मामला सीधे राजनीति (Politics) में पहुंच गया।

BJP ने कांग्रेस से पूछा- ‘Free Kashmir’ पर स्टैंड क्या?

वहीं 24 अक्टूबर को भाजपा (BJP) ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) में सवाल उठाया कि कांग्रेस के उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद जामिया में प्रदर्शनकारियों के बीच क्या कर रहे थे।

भाजपा ने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह जामिया की दीवारों पर लिखे ‘Free Kashmir’ और ‘Release Sharjeel Imam’ जैसे नारों का समर्थन करती है। रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस से कश्मीर (Kashmir) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।

‘कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है’

इमरान मसूद ने भाजपा के सवालों का जवाब देते हुए साफ कहा कि प्रदर्शन के दौरान ‘Free Kashmir’ के समर्थन में कोई नारा नहीं लगाया गया। उनके मुताबिक दीवार पर कुछ लोगों ने लिखावट की थी, लेकिन इसका छात्र आंदोलन से संबंध नहीं था।

मसूद ने कहा कि उन्होंने खुद ऐसे नारों की निंदा की और स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पुलिस से दीवारों पर पोस्टर या नारे लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

मौलाना साजिद रशीदी ने भी बनाई दूरी

इस विवाद में मुस्लिम धर्मगुरु (Muslim Cleric) की प्रतिक्रिया भी सामने आई। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (All India Imam Association) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि जामिया के छात्र अपने अधिकारों (Rights) के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे विवादित नारे लिखकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

रशीदी ने ‘Free Kashmir’ और शरजील इमाम के समर्थन वाले नारों से दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि मुसलमान ऐसे नारों का समर्थन नहीं कर सकता। साथ ही उन्होंने शरजील इमाम की लंबे समय से चली आ रही जेल हिरासत (Jail Custody) और मुकदमे की स्थिति पर सवाल उठाने को अलग मुद्दा बताया।

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद में पहली बार किसी प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु की ओर से इस तरह की सीधी प्रतिक्रिया सामने आई कि छात्र आंदोलन को ऐसे नारों से अलग रखा जाना चाहिए।

‘जिसने लिखा उससे पूछिए’

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Congress Leader) सलमान खुर्शीद से जब ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ वाली लिखावट को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सवाल उन लोगों से होना चाहिए जिन्होंने पोस्टर या लिखावट लगाई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद कोई पोस्टर नहीं लगाया है और जिसने लगाया है उससे पूछा जाना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया।

VHP का आरोप- यह सिर्फ छात्र आंदोलन नहीं

वहीं VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने इन लिखावटों को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि जामिया को भारत विरोधी गतिविधियों (Anti-India Activities) का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से भी सवाल किया और पूछा कि क्या कांग्रेस शरजील इमाम से जुड़े नारों और संविधान तथा राष्ट्रीय एकता (National Unity) को लेकर कथित विवादित विचारों का समर्थन करती है। हालांकि ये VHP के राजनीतिक आरोप हैं और इन नारों के पीछे किस व्यक्ति या संगठन का हाथ था, यह अभी जांच में साबित नहीं हुआ है।

24 अक्टूबर की सुबह जामिया में फिर बढ़ा तनाव

वहीं 24 अक्टूबर को मामला सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं रहा। जामिया परिसर (Campus) में प्रदर्शनकारी छात्रों और सुरक्षा कर्मियों (Security Guards) के बीच तनाव बढ़ गया।

प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को गालिब लॉन से हटाने की कोशिश की। छात्रों का आरोप था कि उनके टेंट (Protest Tents) हटाए गए और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को अस्पताल ले जाने की कोशिश हुई। प्रशासन का कहना था कि प्रदर्शन निर्धारित जगह पर होना चाहिए और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करना जरूरी है।

तनाव बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय ने 24 अक्टूबर से सभी कक्षाएं ऑनलाइन (Online Classes) करने का फैसला किया। बाहर पुलिस की तैनाती भी बढ़ाई गई। जामिया ने अपनी 106वीं स्थापना दिवस (Foundation Day) की प्रस्तावित ‘तालीमी मेला’ (Talimi Mela) गतिविधियां भी रद्द कर दी हैं।

JNU में सामने आया ‘Free Umar Khalid’

जामिया में विवाद अभी थमा भी नहीं था कि 24 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में भी विवादित लिखावट सामने आ गई। JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (School of Social Sciences) की दीवारों पर ‘Free Umar Khalid’ और ‘Long Live Naxalbari’ लिखा मिला। इसके अलावा परिसर में लगी वीर सावरकर (Veer Savarkar) की तस्वीर के पास आपत्तिजनक लिखावट किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।

जामिया में ‘Free Sharjeel Imam’ और अगले दिन JNU में ‘Free Umar Khalid’ सामने आने से दोनों घटनाओं को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

JNU प्रशासन ने क्या किया?

JNU प्रशासन (JNU Administration) ने मामले का संज्ञान लिया और कहा कि पूरे मामले को देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय ने संकेत दिया कि इस तरह की लिखावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी।

हालांकि 24 अक्टूबर की रात तक JNU में भी किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि सामने नहीं आई कि लिखावट किसने की थी।

ABVP ने AISA पर लगाया आरोप

JNU की ABVP इकाई (ABVP Unit) ने इस घटना को लेकर वामपंथी छात्र संगठन (Left Student Groups) पर आरोप लगाया। ABVP ने दावा किया कि सामने आई तस्वीरों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही है और उसने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

लेकिन यहां भी जरूरी बात यही है कि यह ABVP का आरोप है, जांच में अभी यह साबित नहीं हुआ है कि AISA या उसके कार्यकर्ताओं ने ये लिखावट की थी। उपलब्ध रिपोर्टों में AISA की ओर से इस आरोप पर तत्काल प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई थी।

उमर खालिद कौन हैं और ‘Free Umar Khalid’ क्यों लिखा गया?

दरअसल उमर खालिद (Umar Khalid) JNU के पूर्व शोधार्थी (Former Research Scholar) हैं। वह सितंबर 2020 से जेल में हैं और फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों (Delhi Riots) से जुड़े कथित बड़ी साजिश (Larger Conspiracy) के मामले में UAPA के तहत आरोपी हैं। उनके खिलाफ मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। इसका मतलब यह है कि उमर खालिद आरोपी हैं, दोषी ठहराए गए व्यक्ति नहीं।

इसी मामले में शरजील इमाम (Sharjeel Imam) भी आरोपी हैं और वह भी लंबे समय से जेल में हैं। शरजील इमाम 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन (Anti-CAA Protest) के दौरान अपने भाषणों को लेकर भी विवाद में आए थे और बाद में उन पर दिल्ली दंगा साजिश मामले में भी आरोप लगाए गए।

यही वजह है कि जामिया में ‘Free Sharjeel Imam’ और JNU में ‘Free Umar Khalid’ लिखे जाने से दोनों घटनाओं को 2020 के दिल्ली दंगा मामले से जोड़कर देखा जा रहा है।

एक नजर में समझिए पूरी टाइमलाइन

12 अक्टूबर 2026: जामिया में पांच छात्रों ने छात्रसंघ (Students’ Union) बहाली और चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। प्रदर्शन गालिब लॉन में शुरू हुआ।

17 अक्टूबर 2026: प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को गालिब लॉन के इलाके से हटाने की कोशिश के बाद तनाव बढ़ा। इसके बाद कई छात्र संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया।

18 अक्टूबर 2026: जामिया प्रशासन ने छात्रों से बातचीत और उनकी मांगों पर विचार के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई।

19-20 अक्टूबर 2026: समिति और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत हुई, लेकिन छात्रों और प्रशासन के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

21 अक्टूबर 2026: जामिया ने पांच सदस्यीय समिति बनाकर छात्रसंघ का संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। 20 दिसंबर तक ड्राफ्ट तैयार करने की समयसीमा तय हुई। साथ ही पहले की कुछ अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा की बात कही गई।

22 अक्टूबर 2026: लॉ विभाग के छात्रों ने ब्लैक कोट मार्च निकाला। छात्रसंघ चुनाव की मांग जारी रही।

23 अक्टूबर 2026: जामिया परिसर की दीवारों पर ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’, ‘Free Palestine’, ‘RSS Go Back’, ‘VC Go Back’ और अन्य विवादित लिखावट की तस्वीरें सामने आईं। VHP ने इन्हें लेकर कार्रवाई की मांग की। जामिया प्रशासन ने जांच शुरू की और दीवारों से लिखावट हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दिन कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

24 अक्टूबर 2026 की सुबह: मौलाना साजिद रशीदी ने ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ जैसी लिखावट से दूरी बनाई और कहा कि ऐसे नारों से छात्र आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हो सकती है। इमरान मसूद ने भी कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इन नारों की निंदा की।

24 अक्टूबर 2026: जामिया में छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तनाव बढ़ा। प्रदर्शन स्थल पर कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय ने सभी कक्षाएं ऑनलाइन कर दीं। परिसर के बाहर पुलिस की मौजूदगी बढ़ी।

24 अक्टूबर 2026 की शाम: JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की दीवारों पर ‘Free Umar Khalid’ और ‘Long Live Naxalbari’ लिखे मिलने की खबर सामने आई। वीर सावरकर की तस्वीर के पास भी आपत्तिजनक लिखावट की रिपोर्ट आई। JNU प्रशासन ने जांच शुरू कर दी। ABVP ने AISA पर आरोप लगाया, लेकिन आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

अब असली सवाल क्या हैं?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जामिया की दीवारों पर ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ किसने लिखा?

दूसरा सवाल यह है कि क्या इसका जामिया के छात्रसंघ आंदोलन से कोई संबंध है या यह किसी अलग व्यक्ति या समूह की गतिविधि थी।

तीसरा सवाल यह है कि जामिया के बाद JNU में ‘Free Umar Khalid’ और ‘Long Live Naxalbari’ लिखे जाने के पीछे क्या कोई संबंध है या दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं।

चौथा सवाल यह है कि CCTV कैमरों के तार टूटे मिलने और विवादित लिखावट वाले इलाकों के बीच क्या कोई संबंध है।

और पांचवां सवाल यह है कि क्या इस विवाद के कारण जामिया का मूल मुद्दा, यानी करीब 20 साल से बंद पड़े छात्रसंघ (Students’ Union) की बहाली और चुनाव, पीछे चला जाएगा।

फिलहाल सबसे अहम बात

यहां 24 अक्टूबर 2026 की रात तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जामिया में छात्र आंदोलन का मूल मुद्दा छात्रसंघ चुनाव है, न कि ‘Free Kashmir’। विवादित नारे बाद में सामने आए और छात्रों ने उनसे खुद को अलग किया है।

जामिया प्रशासन ने लिखावट हटाने और जिम्मेदार लोगों की पहचान की बात कही है। पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है और विश्वविद्यालय ने सुरक्षा कारणों से कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं।

राजनीतिक स्तर पर भाजपा ने कांग्रेस से सवाल पूछा है, जबकि इमरान मसूद ने ‘Free Kashmir’ के नारे से साफ दूरी बनाते हुए कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। मौलाना साजिद रशीदी ने भी ऐसे नारों का समर्थन नहीं करने की बात कही है।

जिसके बाद अब JNU में ‘Free Umar Khalid’ लिखे जाने के बाद विवाद दूसरे विश्वविद्यालय तक पहुंच गया है। लेकिन 24 अक्टूबर की रात तक दोनों घटनाओं को जोड़ने वाला कोई आधिकारिक जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है और किसी आरोपी की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल सबसे सुरक्षित और तथ्यात्मक निष्कर्ष यही है कि दोनों विश्वविद्यालयों में विवादित लिखावट सामने आई है, जांच जारी है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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