टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 3 शूटर कौन? रेकी, सुपारी और नेपाल भागने के प्लान की पूरी इनसाइड स्टोरी
Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में गिरफ्तार तीनों शूटर कौन हैं? 10 दिन की रेकी, देसी पिस्टल, 50 हजार रुपये एडवांस, अंधेरी में बाइक छोड़कर भागने और कोटा में गिरफ्तारी तक जानिए पूरी कहानी।
Tiger Shroff Firing Case: मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग ने हर किसी को हैरान कर दिया है। मामला सिर्फ कुछ गोलियां चलाने और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हमले की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में करीब 10 दिन की रेकी, टाइगर के घर और जिम पर नजर, हमले के लिए बाइक का इंतजाम, देसी पिस्टल से फायरिंग, हथियार का जाम होना, अंधेरी में बाइक छोड़कर ट्रेन पकड़ना और फिर कोटा में तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी जैसी बातें सामने आई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर टाइगर श्रॉफ को निशाना क्यों बनाया गया और इन तीनों शूटरों को हमला करने के लिए किसने भेजा था। इसी बीच लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) से जुड़े होने का दावा करने वाला सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आया है। पुलिस अब इस एंगल की भी जांच कर रही है।
पहले से चल रही थी टाइगर पर नजर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह हमला अचानक नहीं हुआ था। टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस (Tiger Shroff Shooting Case) में जांच के दौरान सामने आया है कि हमले से पहले कथित तौर पर करीब 10 दिन तक टाइगर की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने टाइगर के घर और जिम के आसपास रेकी की थी। उनके आने-जाने के समय और रोज के शेड्यूल को समझने की कोशिश की गई। सोशल मीडिया पर मौजूद पैपराजी वीडियो और दूसरे कंटेंट से भी टाइगर की गतिविधियों की जानकारी जुटाए जाने का शक है।
यानी हमलावर सिर्फ मौका देखकर गोली चलाने नहीं पहुंचे थे। पुलिस को शक है कि इसके पीछे पहले से तैयारी थी और सही समय का इंतजार किया जा रहा था।
हमले वाले दिन भी करीब 45 मिनट तक रेकी
18 अक्टूबर की शाम टाइगर श्रॉफ फुटबॉल खेलने के बाद अपनी कार से लौट रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने जुहू के पुष्पा पार्क के आसपास करीब 45 मिनट तक कथित तौर पर इंतजार किया।
उनका मकसद टाइगर के बाहर निकलने का सही समय पकड़ना था। जैसे ही टाइगर की कार वहां से निकली, बाइक सवार हमलावरों ने उसका पीछा शुरू कर दिया। इसके बाद कुछ ही देर में मुंबई की सड़कों पर गोलियों की आवाज सुनाई दी।
करीब 7 बजे कार पर बरसने लगीं गोलियां
करीब शाम 7 बजे टाइगर श्रॉफ की कार को बाइक सवार हमलावरों ने निशाना बनाया। इस जुहू फायरिंग केस (Juhu Firing Case) में बाद की FIR और जांच आधारित रिपोर्टों में सात राउंड फायरिंग की बात सामने आई है।
कुछ गोलियां कार की बॉडी और शीशे पर लगीं, जबकि कुछ निशाने से चूक गईं। टाइगर उस समय कार में मौजूद थे। हमले में उनके ड्राइवर को गोली लगी और एक अन्य व्यक्ति के भी घायल होने की जानकारी सामने आई। लेकिन हमले का सबसे बड़ा मोड़ अभी बाकी था।
टाइगर के बेहद करीब पहुंच गया था एक शूटर
फायरिंग के दौरान एक हमलावर टाइगर की कार के पैसेंजर साइड तक पहुंच गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसने बेहद करीब से टाइगर पर गोली चलाने की कोशिश की। अगर उस वक्त गोली चल जाती तो मामला बेहद गंभीर हो सकता था। लेकिन तभी हमलावर का हथियार जाम हो गया।
टाइगर श्रॉफ अटैक (Tiger Shroff Attack) से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक हमलावर ने दोबारा फायर करने की कोशिश की, लेकिन देसी पिस्टल ने काम नहीं किया। इसके बाद हमलावरों ने वहां से निकलना ही बेहतर समझा। यही वजह है कि जांच में हथियार के फेल होने वाले इस हिस्से को बेहद अहम माना जा रहा है।
तीन लोग थे, लेकिन फायरिंग दो ने की
CCTV और शुरुआती जांच के मुताबिक वारदात में तीन लोग शामिल थे। इनमें से दो सीधे फायरिंग कर रहे थे, जबकि तीसरा बाइक लेकर तैयार था। पुलिस को शक है कि तीसरे व्यक्ति की जिम्मेदारी हमला करने के बाद दोनों शूटरों को वहां से निकालने की थी।
फायरिंग के बाद तीनों उसी बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गए। टाइगर श्रॉफ शूटर्स (Tiger Shroff Shooters) को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस ने इसके बाद CCTV फुटेज और दूसरे सुरागों की मदद ली।
अंधेरी तक बाइक से भागे
हमले के बाद आरोपी मुंबई की सड़कों से होते हुए अंधेरी की तरफ निकल गए। करीब चार किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद उन्होंने अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के आसपास बाइक छोड़ दी। यही बाइक बाद में पुलिस के लिए बड़ा सुराग बनी।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग अटैक (Tiger Shroff Firing Attack) की जांच में सामने आया कि बाइक आरोपियों के नाम पर सीधे दर्ज नहीं थी। उसके पुराने मालिकों और कागजों की भी जांच शुरू की गई। पुलिस ने नंबर प्लेट के साथ-साथ चेसिस और इंजन नंबर से बाइक की पूरी हिस्ट्री खंगालनी शुरू की।
बाइक छोड़कर ट्रेन में सवार हुए
बाइक छोड़ने के बाद तीनों आरोपी पैदल रेलवे स्टेशन की तरफ गए और वहां से ट्रेन पकड़ ली। उनका मकसद मुंबई से जल्द से जल्द दूर निकलना था। पुलिस को बाद में पता चला कि तीनों ट्रेन से राजस्थान की तरफ बढ़ रहे हैं। इधर मुंबई पुलिस ने आरोपियों के बारे में राजस्थान पुलिस को जानकारी दे दी। इसके बाद ट्रेन के रास्ते पर नजर रखी जाने लगी।
कोटा में पहुंचते ही पुलिस ने घेर लिया
तीनों आरोपी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में सफर कर रहे थे। ट्रेन जब कोटा पहुंची तो पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।
कोटा पुलिस ने ट्रेन के कोच में तलाशी अभियान चलाया और करीब 15 मिनट के ऑपरेशन में तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया। यह गिरफ्तारी टाइगर श्रॉफ क्राइम न्यूज (Tiger Shroff Crime News) में सबसे अहम घटनाक्रमों में से एक है।यानी मुंबई में फायरिंग के बाद भागे तीनों आरोपी ज्यादा दूर नहीं जा पाए।
कौन हैं ये तीन आरोपी?
गिरफ्तार आरोपियों में 22 साल का ऋतिक कुमार उर्फ रोशन शामिल है। वह मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का रहने वाला बताया गया है और मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में रहता था। रिपोर्टों के मुताबिक वह Rapido बाइक राइडर के तौर पर काम करता था। दूसरा आरोपी 18 साल का रेहान उर्फ सुक्का है। वह हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला बताया गया है।
तीसरा आरोपी 17 साल का नाबालिग है और वह भी सोनीपत का रहने वाला बताया गया है। नाबालिग होने की वजह से उसकी पहचान सार्वजनिक करना उचित नहीं है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों में किसकी क्या भूमिका थी और इन्हें हमला करने के लिए किसने तैयार किया था। टाइगर श्रॉफ फायरिंग आरोपी (Tiger Shroff Firing Accused) से पूछताछ के आधार पर पुलिस आगे की कड़ियां जोड़ रही है।
क्या 50 हजार रुपये में हुआ था हमला?
इस केस में पैसों का एंगल भी सामने आया है। पुलिस सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक तीनों आरोपियों को कथित तौर पर कुल 50 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे। अगर जांच में यह बात साबित होती है तो इससे साफ हो सकता है कि ये आरोपी किसी के निर्देश पर हमला करने पहुंचे थे।
यही वजह है कि पुलिस अब सिर्फ तीनों आरोपियों से पूछताछ तक सीमित नहीं है। उन लोगों की तलाश भी की जा रही है जिन्होंने कथित तौर पर इन्हें पैसे और निर्देश दिए।
नेपाल भागने का था प्लान?
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पुलिस के सामने एक और अहम बात आई। कोटा पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपी पहले दिल्ली जाने और उसके बाद नेपाल भागने की योजना बना रहे थे।
यानी मुंबई से निकलने के बाद उनका मकसद सिर्फ शहर बदलना नहीं था। अगर पूछताछ में सामने आया यह प्लान सही साबित होता है तो माना जा सकता है कि हमले के बाद बच निकलने के लिए पहले से एक एग्जिट प्लान तैयार था।
हालांकि नेपाल भागने की यह बात अभी पुलिस की शुरुआती पूछताछ पर आधारित है और जांच पूरी होने के बाद ही इसकी तस्वीर साफ होगी।
अब आया लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और संवेदनशील एंगल लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) से जुड़ा है। फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट और ऑडियो सामने आया, जिसमें अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया।
सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे को शुरुआत में पुलिस ने आधिकारिक तौर पर सत्यापित नहीं किया था। लेकिन बाद में जांच में एक अहम कड़ी सामने आई।
कोटा पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी रेहान का संपर्क अनिल पंडित से होने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह संपर्क किस तरह का था और क्या फायरिंग के पीछे वास्तव में किसी गैंग का निर्देश था।
कौन है अनिल पंडित?
अनिल पंडित का नाम इससे पहले भी कुछ दूसरे मामलों में सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। उसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। किसी आरोपी या संदिग्ध का किसी व्यक्ति से संपर्क सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरा हमला उसी गैंग ने कराया था।
यही वजह है कि पुलिस अब मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के दूसरे संपर्कों की जांच कर रही है।
टाइगर को आखिर क्यों बनाया गया निशाना?
यह सवाल अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। टाइगर श्रॉफ ने किसी व्यक्तिगत विवाद की जानकारी होने से इनकार किया है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले के पीछे असली वजह क्या थी। क्या यह धमकी देने के लिए किया गया हमला था। क्या किसी गैंग ने अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए टाइगर को निशाना बनाया। क्या इसके पीछे कोई निजी विवाद था। या फिर सिर्फ पैसे लेकर हमला करवाया गया। इन सवालों का जवाब आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल सबूतों से मिलने की उम्मीद है।
बाल-बाल बचे टाइगर
इस पूरे हमले में सबसे बड़ी बात यह रही कि टाइगर श्रॉफ को गोली नहीं लगी। हालांकि फायरिंग के दौरान उनकी कार को नुकसान पहुंचा और उन्हें बारूद तथा कांच के टुकड़ों से चोटें आने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्टों के मुताबिक घटना के बाद वह सुरक्षित रहे और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। बाद में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी टाइगर से मुलाकात की।
अब जांच में क्या-क्या खंगाला जा रहा है?
मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस मामले की कई एंगल से जांच कर रही है। CCTV फुटेज, बाइक, हथियार, मोबाइल फोन, आरोपियों की लोकेशन, सोशल मीडिया अकाउंट और उनके संपर्कों को खंगाला जा रहा है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमलावरों को टाइगर के फुटबॉल खेलने के समय और लौटने की जानकारी कैसे मिली।
इसके अलावा हथियार कहां से आया, बाइक किसने उपलब्ध कराई, 50 हजार रुपये किसने दिए और अनिल पंडित से आरोपियों का संपर्क किस मकसद से था, इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
तीन शूटर गिरफ्तार, लेकिन कहानी अभी बाकी
फिलहाल तस्वीर इतनी साफ है कि तीन आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और जांच एजेंसियों के पास उनके खिलाफ कई अहम सुराग हैं। लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा अभी बाकी है।
तीन शूटर तो पुलिस की गिरफ्त में आ गए, लेकिन उन्हें भेजने वाला कौन था। अगर 50 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे तो पैसे किसने दिए। टाइगर की 10 दिन तक रेकी किसके कहने पर हुई। अनिल पंडित और रेहान के बीच क्या बातचीत हुई और सबसे बड़ा सवाल, क्या इस पूरी फायरिंग के पीछे वाकई लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ है या फिर सोशल मीडिया पर किया गया दावा सिर्फ पुलिस को गुमराह करने की कोशिश थी।
इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे। फिलहाल इतना जरूर है कि टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस (Tiger Shroff Firing Case) में मुंबई से शुरू हुई कहानी कोटा तक पहुंच चुकी है और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उस शख्स या नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिसने कथित तौर पर इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए उन्हें भेजा था।



