नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को हाईकोर्ट में दी चुनौती, 10 हजार रुपये के शांति बॉन्ड पर रोक की मांग
नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को हाईकोर्ट में दी चुनौती
नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी शांति बॉन्ड संबंधी नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। नोटिस में उन्हें जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया है। नेहा बोरा ने अदालत से नोटिस पर रोक लगाने और उसे वापस लेने की मांग की है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली जिला पुलिस की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 तथा धारा 135(3) के तहत यह नोटिस जारी किया गया। इसमें नेहा बोरा को 19 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
नोटिस की वैधता पर उठाए सवाल
AISA के मुताबिक, नेहा बोरा की याचिका में नोटिस को अस्पष्ट और तथ्यों के आधार पर चुनौती दी गई है। संगठन का कहना है कि इस कार्रवाई से उनके मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। याचिका में नोटिस पर तत्काल रोक लगाने के साथ उसे वापस लेने की मांग की गई है।
BNSS की धारा 126 शांति भंग होने की आशंका की स्थिति में संबंधित व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड लेने की प्रक्रिया से जुड़ी है। वहीं, धारा 130 के तहत मजिस्ट्रेट को उस सूचना के संबंध में लिखित आदेश देने का प्रावधान है, जिसके आधार पर ऐसी कार्यवाही शुरू की जाती है।
हिरासत से रिहाई के बाद पीछा करने का आरोप
AISA ने यह आरोप भी लगाया है कि 16 अक्टूबर को हिरासत से रिहा होने के बाद नेहा बोरा का सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी पीछा कर रहे हैं। संगठन ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में दिल्ली पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद शांति बॉन्ड से संबंधित नोटिस जारी होने पर उन्होंने कानूनी चुनौती देने का फैसला किया।
हाईकोर्ट की सुनवाई पर नजर
नेहा बोरा की याचिका के बाद अब मामले में अदालत की अगली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दशहरा अवकाश के कारण दिल्ली हाईकोर्ट बंद है और याचिकाकर्ता की ओर से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किए जाने की संभावना है। फिलहाल, नोटिस पर रोक लगाने या उसे रद्द करने के संबंध में अदालत का अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।



